केंद्र और दिल्ली सरकार ने सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-NCR के एक्शन प्लान की समीक्षा की। बैठक में प्रदूषण की रोकथाम और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। इस दौरान दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सब-डिवीजनल और वार्ड स्तर पर 24 घंटे निगरानी वाली बहुस्तरीय प्रवर्तन व्यवस्था लागू करने की घोषणा की। इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर लगातार नजर रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को तेज करने की तैयारी है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सितंबर 2026 से मार्च 2027 तक दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रस्तावित सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियों और अन्य उपायों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में प्रदूषण की रोकथाम के लिए तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को लेकर चर्चा हुई। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के पर्यावरण मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में ऑनलाइन शामिल हुए।
एकजुट होकर प्रदूषण पर काबू पाने पर जोर
बैठक में वायु प्रदूषण की क्षेत्रीय प्रकृति को देखते हुए दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के बीच लगातार समन्वय की जरूरत पर जोर दिया गया। खासतौर पर सर्दियों के दौरान प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों से निपटने के लिए राज्यों और संबंधित एजेंसियों को मिलकर कार्रवाई करने को जरूरी बताया गया। बैठक के बाद दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पर्यावरण सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारियों, नगर निकायों और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अलग बैठक की। इस दौरान सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार की तैयारियों की समीक्षा की गई और जरूरी कदमों पर चर्चा हुई।
24 घंटे निगरानी करेंगी 78 स्पेशल टीमें
नई प्रवर्तन व्यवस्था के तहत दिल्ली के 39 सब-डिवीजन में 78 स्पेशल टीमें तैनात की जाएंगी। प्रत्येक सब-डिवीजन में दो टीमें रहेंगी। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के सहायक पर्यावरण इंजीनियर और जूनियर पर्यावरण इंजीनियर स्तर के अधिकारी इन टीमों का नेतृत्व करेंगे। ये टीमें 24 घंटे निरीक्षण और निगरानी का काम करेंगी। टीमों की जिम्मेदारी जैव ईंधन जलाने, निर्माण और तोड़फोड़ से होने वाले धूल प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, अनधिकृत ईंधन के इस्तेमाल और निर्माण एवं तोड़फोड़ के मलबे या कचरे के अवैध निस्तारण के खिलाफ कार्रवाई करना होगा।
इसके अलावा, टीमें धूल पोर्टल के जरिए निर्माण और तोड़फोड़ परियोजनाओं की निगरानी करेंगी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देश संख्या-76 के तहत डीजल जनरेटर सेट से जुड़े नियमों के अनुपालन की भी जांच की जाएगी। टीमें दिल्ली नगर निगम के विकेंद्रीकृत निर्माण एवं तोड़फोड़ अपशिष्ट द्वितीयक भंडारण केंद्रों का निरीक्षण करने के साथ-साथ कच्ची सड़कों और बड़े गड्ढों वाली सड़कों की पहचान भी करेंगी।
दिल्ली के हर वार्ड में तैनात होंगी निगरानी टीमें
‘ग्रीन दिल्ली’ और ‘311’ एप्लिकेशन के जरिए मिलने वाली प्रदूषण संबंधी शिकायतों के समय पर निस्तारण की भी निगरानी की जाएगी। जमीनी स्तर पर राजधानी के 256 वार्ड-वार निगरानी टीमें तैनात की जाएंगी। इनमें 250 टीमें दिल्ली नगर निगम (MCD) के वार्डों में, चार नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) क्षेत्र में और दो टीमें दिल्ली छावनी बोर्ड क्षेत्र में काम करेंगी।
ये टीमें स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर 24 घंटे नजर रखेंगी। कचरा या अन्य सामग्री जलाने, निर्माण से होने वाले धूल प्रदूषण, अनधिकृत ईंधन के इस्तेमाल और अवैध कचरा निस्तारण के खिलाफ कार्रवाई करना इनकी प्रमुख जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा, टीमें धूल पोर्टल से जुड़े नियमों के अनुपालन में सहयोग करेंगी और कचरा भंडारण केंद्रों का निरीक्षण करेंगी। प्रदूषण और सड़कों की खराब स्थिति से संबंधित शिकायतों की भी लगातार निगरानी की जाएगी, ताकि समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
48 प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी
सरकार ने कड़े प्रवर्तन के लिए दिल्ली में 48 प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की है। इन इलाकों में औद्योगिक गतिविधियां निर्धारित भूमि उपयोग के अनुरूप नहीं हैं। इन क्षेत्रों में जिलाधिकारी विशेष अभियानों की सीधे निगरानी करेंगे। गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित अनधिकृत और प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
अभियान के दायरे में धातु ढलाई, पाउडर कोटिंग, बफिंग एवं पॉलिशिंग, सुपर इनैमलिंग, प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण, स्प्रे पेंटिंग, डेंटिंग-पेंटिंग और एनीलिंग या हीट ट्रीटमेंट से जुड़ी इकाइयां शामिल हैं। अनधिकृत ईंधन का इस्तेमाल करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर भी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, जल प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक गतिविधियों को भी अभियान में शामिल किया गया है। इनमें जींस की रंगाई और धुलाई, एनोडाइजिंग, पिकलिंग, इलेक्ट्रोप्लेटिंग और फॉस्फेटिंग जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इन गतिविधियों से जुड़े नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सक्रिय और जमीनी कार्रवाई पर रहेगा फोकस: सिरसा
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि इस सर्दी में दिल्ली सरकार का दृष्टिकोण सक्रिय, व्यापक और जमीनी स्तर पर कार्रवाई पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रदूषण की निगरानी के लिए टीमें 24 घंटे काम करेंगी, प्रदूषण के स्रोतों की जल्द पहचान की जाएगी और नियमों का उल्लंघन मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सिरसा ने सभी विभागों और एजेंसियों को पूरे सर्दी के मौसम में कड़ी निगरानी बनाए रखने और नियमों के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), जिलाधिकारियों, नगर निकायों और अन्य विभागों के बीच बेहतर और निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
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