ट्रम्प के दौरे के तुरंत बाद अब पुतिन चीन पहुंच चुके हैं. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के न्योते पर पुतिन का ये दो दिवसीय राजकीय दौरा हुआ है. यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि एक तरफ मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका भिड़ रहे हैं और यूरोप में खुद रूस, यूक्रेन के साथ 4 सालों से जंग लड़ रहा है. बंद कमरों में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच क्या खिचड़ी पकी, इसका पूरा कच्चा चिट्ठा लेने और अमेरिका की घेराबंदी करने के लिए पुतिन खुद बीजिंग उतरे हैं.

इस साल पुतिन की पहली विदेश यात्रा है. इस दौरे को लेकर चीनी मीडिया में चर्चा है. इसे ट्रम्प की दौरे ज्यादा अहम बताया जा रहा है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) के मुताबिक जहां ट्रम्प का दौरा ज्यादा औपचारिक और दिखावटी था, वहीं पुतिन का दौरा ज्यादा गंभीर और रणनीतिक मुद्दों पर केंद्रित रहेगा.

गौरतलब है कि, पुतिन इस दौरे के दौरान चीनी राष्ट्रपति से यूक्रेन जंग खत्म करने और परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते को लेकर बातचीत कर सकते हैं. इसके अलावा वे चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग से अलग मुलाकात करेंगे. इसमें व्यापार और आर्थिक सहयोग पर चर्चा होगी.

पुतिन और जिनपिंग की होगी महा-मीटिंग

पुतिन और जिनपिंग की ये महा-मुलाकात अमेरिका की उस बादशाहत को चुनौती देने के लिए है, जो इस समय वैश्विक ऊर्जा संकट के दलदल में फंसी हुई है. चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शी जिनपिंग के सत्ता संभालने के बाद से दोनों नेताओं के बीच ये दर्जनों वाली मुलाकातों का सिलसिला है और पुतिन का ये 25वां चीन दौरा है. दोनों नेता एक-दूसरे को ‘पक्का दोस्त’ कहते हैं, लेकिन इस बार की मुलाकात सिर्फ शिष्टाचार नहीं है.

20 से ज्यादा बार चीन का दौरा कर चुके हैं पुतिन

रूस के राष्ट्रपति पुतिन अब तक 20 से ज्यादा बार चीन का दौरा कर चुके हैं. दोनों नेता अब तक 40 से ज्यादा बार मुलाकात कर चुके हैं. पुतिन और जिनपिंग की दोस्ती दुनिया की सबसे मजबूत राजनीतिक साझेदारियों में मानी जाती है. 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने अपनी पहली विदेश यात्रा रूस की की थी. वहीं पुतिन भी कई बार चीन को अपनी शुरुआती विदेशी यात्राओं में प्राथमिकता देते रहे हैं. दोनों नेता सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे को करीबी दोस्त और रणनीतिक साझेदार बता चुके हैं.

अमेरिका-रूस के बीच संतुलन बनाने की कोशिश

विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि ये बड़े दौरे दिखाते हैं कि चीन एक साथ अमेरिका और रूस दोनों के साथ रिश्ते संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है, खासकर ऐसे समय में जब यूक्रेन और ईरान से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक तनाव बना हुआ है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन के पास यह मौका है कि वह एक साथ अमेरिका और रूस दोनों के साथ बातचीत करके अपनी वैश्विक भूमिका को मजबूत दिखाए और ख़ुद को ग्लोबल लीडर के तौर पर स्थापित करे.

अमेरिका के खिलाफ नया वर्ल्ड ऑर्डर

पुतिन और जिनपिंग की यह बैठक केवल बातचीत तक सीमित नहीं रहने वाली. दोनों नेता ट्रेड, एनर्जी, डिफेंस और खासकर पश्चिमी देशों यानी अमेरिका के प्रभाव को पूरी तरह कुचलने के लिए एक सुर में बात कर रहे हैं. जहां एक तरफ अमेरिका मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ उलझा हुआ है, वहीं रूस और चीन उसका फायदा उठाकर पूरी दुनिया में अपना नया ‘वर्ल्ड ऑर्डर’ स्थापित करना चाहते हैं. पुतिन की इस 25वीं चीन यात्रा के बाद जो फैसले सामने आएंगे, वो ये तय करेंगे कि आने वाले समय में दुनिया का बॉस कौन होगा?

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