Rajasthan News: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में राजस्थान के कोटा की बॉक्सर अरुंधति चौधरी ने 102 डिग्री बुखार के बावजूद रिंग में उतरकर गोल्ड मेडल जीत लिया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम पर भारत का राष्ट्रगान सुनना उनका सपना था, जो अब पूरा हो गया है। गोल्ड मेडल जीतने के बाद अरुंधति ने अपने परिवार के समर्थन और प्रार्थनाओं को इस सफलता का सबसे बड़ा कारण बताया।

परिवार की प्रार्थनाओं ने मुझे यहां तक पहुंचाया
मीडिया से बातचीत में अरुंधति चौधरी ने कहा कि उनके पिता ने उनका नाम अरुंधति रखा था और आज गोल्ड मेडल जीतना उनके पूरे परिवार के विश्वास और आशीर्वाद का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत लौटने के बाद वह सबसे पहले अपने परिवार के साथ अपना पसंदीदा खाना खाना चाहेंगी। साथ ही उन्होंने साफ किया कि अब उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है। अरुंधति ने देशभर की बेटियों से कहा कि वे बड़े सपने देखें, खुद पर भरोसा रखें और लगातार मेहनत करें।
पिता ने तीन दिन तक नहीं खाया अन्न
अरुंधति के पिता सुरेश चौधरी ने बताया कि फाइनल मुकाबले से पहले वह श्रीनाथजी मंदिर में बेटी की जीत के लिए प्रार्थना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने लगातार तीन दिन तक अन्न ग्रहण नहीं किया था और उन्हें पूरा विश्वास था कि उनकी बेटी देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लौटेगी। जीत की खबर मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं।
102 डिग्री बुखार से चिंतित था परिवार
अरुंधति की बहन डॉ. चारु चौधरी ने बताया कि फाइनल मुकाबले से पहले 102 डिग्री बुखार होने से पूरा परिवार चिंतित था। इसके बावजूद सभी ने भगवान से लगातार प्रार्थना की। उनके भाई शिवराज सेमीफाइनल के बाद उज्जैन के महाकाल मंदिर में बहन की जीत के लिए दर्शन करने पहुंचे थे। परिवार के अन्य सदस्यों को भी विश्वास था कि अरुंधति गोल्ड मेडल जीतकर ही लौटेंगी।
जीत के बाद घर में जश्न का माहौल
जैसे ही अरुंधति की जीत की घोषणा हुई, परिवार के सदस्य भावुक हो गए और एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी मनाई। इसके बाद सभी ने घर के मंदिर में भगवान का आभार जताया। घर में आतिशबाजी की गई, मिठाइयां बांटी गईं और बधाई देने वालों के फोन लगातार आते रहे।
वीडियो कॉल पर भावुक हुए माता-पिता
गोल्ड मेडल जीतने के बाद अरुंधति के पिता, जो श्रीनाथजी मंदिर में थे, और घर पर मौजूद उनकी अस्वस्थ मां ने वीडियो कॉल के जरिए एक-दूसरे को बधाई दी। इस दौरान दोनों भावुक हो गए। परिवार ने इस उपलब्धि को केवल अपनी नहीं, बल्कि पूरे देश और कोटा के लिए गर्व का पल बताया।
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