RR Ownership Row: आईपीएल सीजन 19 के बीच राजस्थान रॉयल्स फ्रेंचाइजी के मालिकाना हक को लेकर विवाद अब बड़ा रूप लेता जा रहा है। लक्ष्मी निवास मित्तल, आदित्य मित्तल और अदार पूनावाला के कंसोर्टियम द्वारा करीब 1.65 बिलियन डॉलर (लगभग 15,600–15,660 करोड़ रुपये) में टीम की 93% हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब काल सोमानी के नेतृत्व वाले समूह ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

5 मई 2026 को जारी अपने आधिकारिक बयान में काल सोमानी, रॉब वॉल्टन, जॉर्डन वॉल्टन और माइकल हैम्प ने डील से बाहर किए जाने पर गहरी निराशा जताते हुए इसे “लेवल प्लेइंग फील्ड” के खिलाफ बताया है।

“6 महीने तक सबसे आगे रहे, फिर भी बाहर कर दिए गए”

सोमानी कंसोर्टियम का दावा है कि वे पिछले छह महीनों से इस नीलामी प्रक्रिया में लगातार सबसे आगे थे और शुरुआत से लेकर अंत तक उनकी बोली लीड में रही। समूह ने कहा कि उन्होंने वैश्विक स्तर के निवेशकों का मजबूत कंसोर्टियम तैयार किया था, जिसमें NFL, MLB, EPL, La Liga और TGL जैसी बड़ी लीग्स से जुड़े अनुभवी लोग शामिल थे, साथ ही शीर्ष स्तर के वैश्विक खेल सितारे भी इस समूह का हिस्सा थे।

“पूरी तरह फंडेड थे, कभी पीछे नहीं हटे”

अपने बयान में समूह ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने अपनी बोली वापस ले ली थी। उन्होंने साफ किया कि उनका कंसोर्टियम पूरी तरह फंडेड था, डील को अंतिम रूप देने के लिए पूरी तरह तैयार था और सभी जरूरी दस्तावेज पूरे कर लिए गए थे।

यहां तक कि उन्होंने दावा किया कि उन्हें जानकारी दी गई थी कि शनिवार को होने वाली फ्रेंचाइजी बोर्ड मीटिंग में उनके प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी, लेकिन अंतिम समय में फैसला बदल गया।

‘बैकडोर डील’ और देरी के आरोप

इससे पहले आई रिपोर्ट्स में सोमानी ग्रुप ने आरोप लगाया था कि पिछले 10 दिनों तक उन्हें डील फाइनल होने का इंतजार कराया गया, जबकि पर्दे के पीछे मित्तल परिवार के साथ समझौता कर लिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बोली 1.63 बिलियन डॉलर की थी और वे डील क्लोज करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। उनके साथ अमेरिकी निवेशक रॉब वॉल्टन और हैम्प परिवार भी जुड़े हुए थे।

भुगतान में देरी या प्रक्रिया में खामी?

कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि सोमानी ग्रुप को भुगतान के लिए एक महीने का समय दिया गया था, लेकिन वे तय समय में राशि जमा नहीं कर पाए। हालांकि, समूह ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे पूरी तरह तैयार थे और जानबूझकर प्रक्रिया में देरी की गई।

अमेरिका स्थित एक अन्य सूत्र के मुताबिक, राजस्थान रॉयल्स मैनेजमेंट की ओर से करीब 90% दस्तावेज लंबित रखे गए, जिससे डील प्रभावित हुई। सोमानी ग्रुप का कहना है कि फंडिंग उनके लिए कभी समस्या नहीं थी।

दूसरी ओर, मित्तल-पूनावाला कंसोर्टियम ने राजस्थान रॉयल्स की 93% हिस्सेदारी करीब 1.65 बिलियन डॉलर में खरीद ली है। डील के तहत मित्तल परिवार के पास 75%, अदार पूनावाला के पास 18% और शेष 7% हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों- मनोज बडाले और अन्य के पास रहेगी।

टीम के नए बोर्ड में लक्ष्मी मित्तल, आदित्य मित्तल, वनीषा मित्तल-भाटिया, अदार पूनावाला और मनोज बडाले शामिल होंगे। इस डील के बाद राजस्थान रॉयल्स IPL की सबसे महंगी फ्रेंचाइजियों में शुमार हो गई है।

“पारदर्शिता और ईमानदारी की कमी”

सोमानी ग्रुप ने अपने बयान में कहा कि इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता, निरंतरता और ईमानदारी का होना बेहद जरूरी है, लेकिन इस डील में इन मूल्यों की कमी नजर आई।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया में ईमानदारी, प्रोफेशनलिज्म और गुड फेथ के साथ भाग लिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित मौका नहीं मिला।

देखें सोमानी ग्रुप का स्टेटमेंट

अब आगे क्या?

सोमानी ग्रुप पहले ही इस मामले में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है और BCCI को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराने की तैयारी में है। अगर मामला अदालत तक पहुंचता है, तो इसका असर न सिर्फ राजस्थान रॉयल्स बल्कि पूरे IPL इकोसिस्टम पर पड़ सकता है।

हालांकि, अपने बयान के अंत में समूह ने यह भी कहा कि वे भविष्य में ऐसे ही बड़े निवेश अवसरों की तलाश जारी रखेंगे और वैश्विक खेल बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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