रायपुर। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के बीच लंबे समय से चले आ रहे बिजली भुगतान विवाद के समाधान की उम्मीद एक बार फिर जगी है। तेलंगाना से बिजली की करीब 3600 करोड़ रुपए की बकाया राशि वसूलने के लिए छत्तीसगढ़ पावर कंपनी और तेलंगाना पावर कंपनी के बीच दोबारा बातचीत शुरू हो गई है। बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के बाद छत्तीसगढ़ पावर कंपनी ने विद्युत नियामक आयोग से मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। आयोग ने अब इस प्रकरण की सुनवाई दिसंबर तक टाल दी है।
दिसंबर में होगी मामले की अगली सुनवाई
छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग के एक सदस्य के मुताबिक, छत्तीसगढ़ पावर कंपनी के जवाब के आधार पर सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाई गई है। दोनों कंपनियों के बीच बकाया भुगतान को लेकर बातचीत चल रही है। ऐसे में अब मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।
दोनों राज्यों के बीच पुराना विवाद
दोनों राज्यों के बीच बिजली भुगतान का विवाद पुराना है। रमन सिंह सरकार के कार्यकाल में तेलंगाना के साथ बिजली आपूर्ति को लेकर समझौता हुआ था। इसके तहत तत्कालीन छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड द्वारा अलग-अलग समय में कोरबा के मड़वा पावर प्लांट से तेलंगाना को एक हजार मेगावाट तक बिजली की आपूर्ति की गई थी।
बाद में तेलंगाना बिजली बोर्ड की ओर से भुगतान रोक दिया गया। इसके चलते बकाया राशि बढ़ते-बढ़ते करीब 3600 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। भुगतान को लेकर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई। बताया जाता है कि तेलंगाना करीब 2100 करोड़ रुपए की राशि को ही बकाया मान रहा है। किस्तों में भुगतान को लेकर सहमति बनने के बावजूद भुगतान नहीं हो सका। इसके बाद छत्तीसगढ़ पावर कंपनी ने बिजली आपूर्ति बंद कर दी।
सरचार्ज की राशि भी बड़ी
राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के एडिशनल सीई एसके पांडेय ने बताया कि तेलंगाना पावर कंपनी के साथ अब तक हुई बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। तेलंगाना कंपनी बकाया बिल के भुगतान के लिए तैयार दिखाई दे रही है।
उन्होंने बताया कि करीब 3600 करोड़ रुपए के कुल बकाये में बड़ी राशि सरचार्ज की है। ऐसे में नियामक आयोग के माध्यम से बकाया राशि की एक निश्चित रकम तय की जा सकती है।
तेलंगाना सरकार ने लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप
इधर, तेलंगाना में सरकार बदलने के बाद मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की सरकार ने पूर्ववर्ती केसीआर सरकार पर छत्तीसगढ़ से बिजली खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। आरोप था कि बिना टेंडर अधिक दर पर बिजली खरीदने के कारण तेलंगाना बिजली बोर्ड को 1300 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ।
इस मामले की न्यायिक जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन भी किया गया है। फिलहाल दोनों पावर कंपनियों के बीच दोबारा शुरू हुई बातचीत से लंबे समय से लंबित बिजली भुगतान विवाद के समाधान की उम्मीद बढ़ी है। अब दिसंबर में होने वाली विद्युत नियामक आयोग की सुनवाई में बातचीत के नतीजे सामने आ सकते हैं।
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