राजधानी Delhi के एक लाख से अधिक व्यापारियों को बड़ा फायदा देने वाला फैसला MCD ने लिया है. अब जनरल ट्रेड लाइसेंस (GTL) और भंडारण (स्टोरेज) लाइसेंस का शुल्क संपत्ति कर के साथ ही जमा किया जा सकेगा. नगर निगम के इस निर्णय के तहत व्यापारियों को अलग-अलग भुगतान की झंझट से राहत मिलेगी. नई व्यवस्था में उन्हें अपनी संपत्ति के वार्षिक प्रॉपर्टी टैक्स का कुल 15 प्रतिशत अतिरिक्त राशि के रूप में जनरल ट्रेड लाइसेंस और भंडारण शुल्क के तौर पर जमा करनी होगी.

अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल बनाना और भुगतान प्रक्रिया को एकीकृत करना है. इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि राजस्व संग्रह में भी सुधार होने की उम्मीद है. नई व्यवस्था को MCD की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए लागू किया जाएगा, जहां व्यापारी एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी संबंधित शुल्क जमा कर सकेंगे.

अब जनरल ट्रेड लाइसेंस (GTL) और भंडारण लाइसेंस शुल्क को संपत्ति कर के साथ जोड़ दिया गया है. निगम प्रशासन ने इस संबंध में 30 अप्रैल से प्रभावी आदेश जारी कर दिया है. नई व्यवस्था के तहत व्यापारियों को अपनी संपत्ति के वार्षिक प्रॉपर्टी टैक्स का कुल 15 प्रतिशत अतिरिक्त राशि के रूप में जनरल ट्रेड लाइसेंस और भंडारण शुल्क के तौर पर जमा करना होगा. इस फैसले से दिल्ली के एक लाख से अधिक व्यापारियों को फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें अलग-अलग लाइसेंस शुल्क जमा करने की जरूरत नहीं होगी. पूरी प्रक्रिया MCD की वेबसाइट के जरिए एकीकृत रूप से पूरी की जा सकेगी. हालांकि, निगम ने स्पष्ट किया है. प्रदूषण प्रमाण पत्र और फायर NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) संबंधित विभागों से लेना अब भी अनिवार्य रहेगा.

सीटीआई चेयरमैन Brijesh Goyal ने बताया कि निगम ने अब संपत्ति कर के साथ ही GTL शुल्क जमा करने का आदेश जारी कर दिया है. इस नई व्यवस्था में व्यापारियों को अलग से भारी शुल्क देने की जरूरत नहीं होगी. पहले यदि कोई व्यापारी अपनी दुकान के लिए सालाना 8,000 रुपये संपत्ति कर जमा करता था, तो उसे अलग से लगभग 6,000 रुपये तक जनरल ट्रेड लाइसेंस शुल्क देना पड़ता था. अब नई व्यवस्था के तहत GTL शुल्क को संपत्ति कर से जोड़ दिया गया है व्यापारियों को सिर्फ संपत्ति कर का 15% ही GTL शुल्क के रूप में देना होगा यानी अगर कोई व्यापारी 8,000 रुपये प्रॉपर्टी टैक्स देता है, तो अब उसे केवल 1,200 रुपये (15%) ही GTL शुल्क देना होगा.

क्या होगा फायदा?

अलग आवेदन की जरूरत खत्म:

अब व्यापारियों को जनरल ट्रेड लाइसेंस और भंडारण शुल्क के लिए निगम की वेबसाइट पर अलग से आवेदन नहीं करना होगा.

एकीकृत भुगतान व्यवस्था:

अपनी संपत्ति के वार्षिक प्रॉपर्टी टैक्स के साथ ही जनरल ट्रेड लाइसेंस शुल्क स्वतः जुड़कर आ जाएगा.

कम शुल्क का भुगतान:

व्यापारियों को अब केवल संपत्ति कर का 15 प्रतिशत ही जनरल ट्रेड लाइसेंस शुल्क के रूप में जमा करना होगा, जो पहले के मुकाबले काफी कम है.

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