दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) सोमवार को एक बार फिर सत्य निकेतन पहुंचीं, जहां 5 मंजिला इमारत ढहने से 6 लोगों की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का जायजा लिया और मौके पर चल रहे राहत एवं बचाव कार्य की स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjindar Singh Sirsa) भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों और रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी विभिन्न एजेंसियों के अधिकारियों से बातचीत कर अब तक की कार्रवाई और मौजूदा स्थिति की जानकारी ली।

मौके पर MCD कमिश्नर संजीव खिरवार, भाजपा विधायक अनिल शर्मा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री और मंत्री को राहत-बचाव अभियान की प्रगति और घटनास्थल की स्थिति से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने रेस्क्यू टीमों से भी जानकारी ली और अभियान को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए। प्रशासन का फोकस मलबे में किसी के फंसे होने की आशंका के बीच सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन को तेजी से पूरा करने पर है।

घटनास्थल का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे के लिए इमारत के मालिक की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यह काफी पुरानी बिल्डिंग थी और बेसमेंट में पानी भरने की वजह से उसके पिलर्स कमजोर होकर गिर गए, जिसके चलते पूरी इमारत ढह गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई पहले ही शुरू की जा चुकी है और मकान मालिक के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सत्य निकेतन और आसपास की अन्य खतरनाक इमारतों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। रेखा गुप्ता ने बताया कि हादसे वाली इमारत के पीछे स्थित एक अन्य खतरनाक बिल्डिंग को खाली करा लिया गया है। इसे भी जल्द गिराने की कार्रवाई की जाएगी।

सिरसा बोले- बगल की इमारत को गिराया जाएगा, अभी मलबा हटाना चुनौती

दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सत्य निकेतन में NDRF की टीमें लगातार राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि घटनास्थल की स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि हादसे वाली इमारत के ठीक पीछे मौजूद भवन भी करीब 40-50 साल पुराना और अस्थिर है। सिरसा ने कहा कि मलबा हटाते समय सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि पीछे वाली इमारत को कोई नुकसान न पहुंचे। NDRF को मलबे के नीचे किसी और व्यक्ति के दबे होने की आशंका की जांच भी सावधानीपूर्वक करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि NDRF एक सक्षम बल है और उन्होंने अभियान को लेकर अधिकारियों तथा NDRF प्रमुख से भी जानकारी ली है।

खाली कराई गई इमारत को जल्द गिराया जाएगा

सिरसा के मुताबिक, हादसे के पीछे मौजूद खतरनाक इमारत को पहले ही खाली करा लिया गया है और इसे गिराने की योजना तैयार की जा रही है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में इसे तुरंत गिराना संभव नहीं है, क्योंकि ढांचा अस्थिर है और मलबे के नीचे की स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले मलबे के नीचे किसी व्यक्ति के फंसे होने की स्थिति को लेकर पूरी जांच जरूरी है। इसके बाद ही आसपास की अस्थिर इमारत को गिराने की कार्रवाई की जाएगी।

बेसमेंट में काम को लेकर भी उठे सवाल

सिरसा ने कहा कि अब तक मिली जानकारी के अनुसार हादसे वाली इमारत करीब 40-50 साल पुरानी थी। उन्होंने दावा किया कि बेसमेंट में काम करने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद यह हादसा हुआ।  उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि हादसे से जुड़े सभी मुद्दों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल राहत-बचाव अभियान पूरा करने और आसपास की खतरनाक इमारतों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।

मलबे में अज्ञात मजदूर के दबे होने की आशंका

मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि फिलहाल यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि मलबे में कोई और व्यक्ति फंसा है या नहीं। उन्होंने बताया कि हादसे वाली इमारत में रहने वाले छात्रों का हिसाब लगाया जा चुका है। अब तक 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जबकि 6 लोगों की मौत हुई है। सिरसा ने कहा कि मलबे में किसी अज्ञात मजदूर के फंसे होने की आशंका है, लेकिन जब तक राहत और बचाव अभियान पूरा नहीं हो जाता, तब तक इस बारे में कुछ भी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। NDRF की टीमें मलबे की गहन जांच कर रही हैं और संभावित स्थानों पर तलाश जारी है।मंत्री ने कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले में जरूरी कानूनी कार्रवाई के साथ मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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