गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात करने पहुंचे विपक्षी सांसदों को प्रशासन ने रोक दिया। इसके विरोध में सांसदों ने अस्पताल परिसर के बाहर धरना दिया और 50 से अधिक सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित समर्थन पत्र उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि को सौंपकर वापस लौट गए।
गुरुग्राम। स्थित मेदांता अस्पताल में उपचाराधीन सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मिलने आए विपक्षी दलों के सांसदों को अस्पताल प्रबंधन द्वारा मिलने की इजाजत नहीं दी गई। इस बात से नाराज सांसद अस्पताल परिसर के बाहर ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन पर मिलने से रोकने का आरोप लगाया। घटना के दौरान अस्पताल परिसर समेत आईसीयू वार्ड के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे।
पत्नी को सौंपा समर्थन पत्र
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य वांगचुक से मिलकर उनका अनशन खत्म कराने की अपील करना था। सांसद अपने साथ 50 से अधिक विपक्षी सांसदों के दस्तखत वाला एक पत्र भी लाए थे। मुलाकात न होने की स्थिति में उन्होंने यह पत्र वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि को दिया और उनसे चर्चा करने के पश्चात दिल्ली वापस चले गए।

सांसदों और पत्नी की प्रतिक्रिया
मुलाकात की अनुमति न मिलने पर आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि वे 50 से अधिक जनप्रतिनिधियों का समर्थन पत्र लेकर वांगचुक से अनशन वापस लेने की गुजारिश करने पहुंचे थे, मगर प्रशासन ने मिलने नहीं दिया। वहीं समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया।
दूसरी ओर, सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि ने आरोप लगाया कि मिलने आने वाले हर शख्स को जानबूझकर रोका जा रहा है और जैसे ही कोई आता है, अतिरिक्त बल तैनात कर दिया जाता है, जिससे संवाद का वातावरण नहीं बन पा रहा है।
लिखित आश्वासन पर ही हटेगा अनशन
डॉ. गीतांजलि ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्र सरकार प्रदर्शन में शामिल युवाओं की सुरक्षा तथा उनके खिलाफ भविष्य में कोई पुलिस मामला दर्ज न करने की लिखित गारंटी नहीं देती, तब तक सोनम वांगचुक का आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि भूख हड़ताल के 25वें दिन वांगचुक के शारीरिक मानक स्थिर बने हुए हैं, लेकिन उनका वजन करीब 11 किलो घट चुका है और शरीर काफी कमजोर हो गया है, फिर भी उनका अनशन जारी रहेगा।


