दिल्ली की रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) सरकार सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर नई नीति लागू करने की तैयारी में है। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार 17 सितंबर से शुरू होने वाले ‘सेवा पखवाड़े’ के दौरान नई ट्रांसफर पॉलिसी (transfer policy) की घोषणा कर सकती है। प्रस्तावित नीति के तहत शिक्षकों के ट्रांसफर की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और तकनीक आधारित बनाने की योजना है। इसके लिए सरकार एक अलग ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार कर सकती है। इस पोर्टल के जरिए ट्रांसफर प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से संचालित किए जाने की संभावना है।
टीचर्स को मिलेगी यूनिक आईडी
प्रस्तावित पॉलिसी में सभी शिक्षकों को यूनिक आईडी देने पर भी विचार किया जा रहा है। इस आईडी के जरिए शिक्षकों का सर्विस रिकॉर्ड, पोस्टिंग हिस्ट्री, मौजूदा स्कूल में कार्यकाल और अन्य जरूरी जानकारियां एक सेंट्रल डेटाबेस में रखी जा सकेंगी। शिक्षक पोर्टल पर अपनी जानकारी देख सकेंगे। ट्रांसफर विंडो खुलने के बाद वे इसी पोर्टल के माध्यम से ट्रांसफर प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे। इससे रिकॉर्ड को एक जगह उपलब्ध कराने और प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पॉइंट्स के आधार पर तय होगी ट्रांसफर की प्राथमिकता
प्रस्तावित पॉलिसी की प्रमुख विशेषताओं में पॉइंट्स-बेस्ड सिस्टम शामिल हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, शिक्षकों को अलग-अलग कैटेगरी में अंक दिए जाएंगे और उनके कुल स्कोर के आधार पर ट्रांसफर की प्राथमिकता तय की जाएगी। इसमें शिक्षक की सर्विस अवधि, मौजूदा स्कूल में कार्यकाल और व्यक्तिगत या पारिवारिक परिस्थितियों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकता है। इसके अलावा उपलब्ध रिक्त पदों को भी ट्रांसफर की प्राथमिकता तय करते समय आधार बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि यूनिक आईडी, सेंट्रल डेटाबेस और पॉइंट्स-बेस्ड सिस्टम के जरिए ट्रांसफर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और तकनीक आधारित बनाया जा सकेगा।
दिल्ली सरकार की प्रस्तावित टीचर्स ट्रांसफर पॉलिसी तैयार करते समय हरियाणा के ऑनलाइन ट्रांसफर मॉडल के कुछ पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया है। हालांकि, अधिकारी के मुताबिक दिल्ली सरकार हरियाणा के मॉडल को हूबहू लागू करने के बजाय उसके कुछ प्रावधानों को अपनी जरूरत के अनुसार अपना सकती है। हरियाणा के ट्रांसफर मॉडल में उम्र के आधार पर पॉइंट्स और महिला कर्मचारियों के लिए अलग प्रावधान शामिल हैं। इसी तर्ज पर दिल्ली की प्रस्तावित नीति में भी अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर शिक्षकों को अतिरिक्त वेटेज देने की व्यवस्था की जा सकती है।
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