Bihar News: दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर दो महिला पत्रकारों के साथ हुए मारपीट का मामला तूल पकड़ता हुआ दिख रहा है। देशभर में इस घटना को लेकर लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस घटना का जिक्र करते हुए भाजपा पर निशाना साधा है।

तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर साधा निशाना

तेजस्वी यादव ने घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया एक्स पर साझा करते हुए लिखा, ये मुसलमान है। ये महिला है। ये पत्रकार है। ये Gen-Z है। इनका जुर्म इतना है कि देशभक्त महिला पत्रकार ने दिल्ली की मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से सवाल पूछ लिया। फिर अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने बेरहमी से इस बहन की पिटाई कर दी।

न्यू इंडिया में मुसलमान होना गुनाह- तेजस्वी

नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि, मोदी जी के अमृतकाल वाले कथित न्यू इंडिया में अब मुसलमान होना, महिला होना और निष्पक्ष पत्रकार होना, सबसे बड़ा गुनाह है। तेजस्वी ने कहा कि, भाजपा ने पूरे देश में सत्ताई निरंकुशता की हर सीमा को लांघ दिया है। निरंकुश भाजपा सरकारों से अब सवाल पूछना उनकी आलोचना करना ही सबसे बड़ा अपराध है। दिल्ली हो या बिहार, हर जगह कायर भाजपाई अब पुलिस से पत्रकारों को पिटवा रहे हैं, डरा रहे हैं। भाजपा के शासनकाल में संवैधानिक संस्थाएं और पुलिस लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रतीक बन गई है।

कमरे में बंद कर पिटाई का आरोप

दरअसल दो स्वतंत्र महिला पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान ने दिल्ली की साकेत पुलिस पर थाने के अंदर उनके साथ बेरहमी के साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है। महिला पत्रकारों का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें एक कमरे में बंद करके डंडों और थप्पड़ों से पीटा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पत्रकारों ने यह भी दावा किया है कि जब पुलिसकर्मियों को पता चला कि वे मुस्लिम हैं, तो उनके साथ मारपीट और धार्मिक नफरत भरी बयानबाजी और बढ़ गई।

अब तो तू और पिटेगी…..

पीड़ित महिला पत्रकारों के मुताबिक, वे दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से उनके ‘जन सुनवाई’ कार्यक्रम के दौरान सवाल पूछना चाहती थीं, जिसके कारण दिल्ली पुलिस ने उन पर गुस्सा निकाला। उनका आरोप है कि साकेत थाने के एसएचओ और महिला कांस्टेबलों ने उन्हें घसीटा, फोन छीन लिया और कमरे में ले जाकर बुरी तरह पीटा। पत्रकार शाहीन खान ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि उनका सरनेम ‘खान’ जानने के बाद पुलिसकर्मियों ने “अब तो तू और पिटेगी” कहकर लाठियां बरसाईं।

पुलिस ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं, दिल्ली पुलिस (दक्षिण जिला डीसीपी अनंत मित्तल) ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से झूठा, भ्रामक और निराधार बताया है। पुलिस के अनुसार, महिलाएं वीवीआईपी रूट पर अपना स्कूटर खड़ा कर रही थीं। बार-बार हटाने के अनुरोध के बावजूद उन्होंने इससे इंकार कर दिया, जिसके बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन के कारण उन्हें पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। पुलिस का दावा है कि इन पत्रकारों ने मौके पर हंगामा किया और वहां ड्यूटी पर तैनात एक गर्भवती महिला पुलिसकर्मी के साथ हाथापाई भी की। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर राजनीति तेज होती दिख रही है।

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