Dharm DESK: ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या इस बार बेहद खास संयोग लेकर आई है। 14 और 15 जून को लगातार दो दिन अमावस्या तिथि रहेगी। ऐसे दुर्लभ मौके पर किए गए छोटे-छोटे शुभ काम भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। मान्यता है कि अमावस्या पर पूजा, दान-पुण्य, तर्पण और भगवान की आराधना करने से पितरों की कृपा मिलती है। घर-परिवार में सुख, शांति व समृद्धि बनी रहती है। खासतौर पर अधिक मास की अमावस्या होने के कारण इस दिन किए गए धार्मिक कार्य अक्षय पुण्य प्रदान करते है। जिसका प्रभाव लंबे समय तक जीवन में दिखाई देता है।

अमावस्या तिथि का प्रारंभ

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर लगभग 12:20 बजे प्रारंभ होगी और 15 जून की सुबह 8:25 बजे समाप्त होगी। इस दौरान विशेष रूप से दोपहर का समय, जिसे ‘कुतुप काल’ कहा जाता है। पितरों की तृप्ति के लिए सबसे श्रेष्ठ है। इस समय धूप-ध्यान, तर्पण और दान करना अत्यंत फल देगा।

पितरों की शांति के लिए करें ये उपाय

अमावस्या के दिन घर में या किसी शांत स्थान पर गोबर के कंडे जलाकर, अंगारों पर गुड़, घी और खीर-पूड़ी अर्पित करे । इस दौरान “ॐ पितृदेवेभ्यो नमः” मंत्र का जप करें। जल में काले तिल मिलाकर तीन बार अर्पण करने से पितरों को तृप्ति मिलती है। साथ ही जरूरतमंद को भोजन कराना और वस्त्र, अन्न या धन का दान करना विशेष पुण्यदायक होगा।

सोमवार के कारण अमावस्या का बढ़ा महत्व

जब अमावस्या सोमवार को आती है, तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है l सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत और पूजा करती है ।

अमावस्या पर करें ये शुभ कार्य

पीपल के पेड़ के नीचे सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करे। भगवान शिव का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करें और ओम नमः शिवाय मंत्र का जप करें। घर के मंदिर में धूप-दीप जलाकर आरती करे। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें। अन्यथा घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। शाम को तुलसी के पास दीपक जलाना भी शुभ माना गया है।

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