Dharm Desk – अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास अब अपने अंतिम चरण में है. इसके समाप्त होने में केवल कुछ ही दिन शेष रह गए हैं. धार्मिक मान्यता है, ये महीना स्वयं भगवान नारायण को समर्पित होता है. इसलिए इस दौरान किया हर जप, तप, दान और व्रत अक्षय फल देने वाला होता है.

कब से शुरू हुआ और कब होगा समाप्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिकमास का आरंभ इस वर्ष 17 मई से हुआ थाl इसका समापन 15 जून को होने जा रहा है. यानी अब केवल अंतिम कुछ दिन ही शेष हैं, जिन्हें शास्त्रों में सबसे अधिक फल दायी माना गया है.
अब क्यों है यह समय सबसे महत्वपूर्ण
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार,अधिक मास के अंतिम 5 दिन पूरे महीने की साधना का निष्कर्ष होते हैं. यदि कोई व्यक्ति पूरे महीने नियमों का पालन नहीं कर पाया, तो इन आखिरी दिनों में किए गए उपाय भी उतना ही पुण्य दे सकते है. इसलिए यह समय ‘अंतिम अवसर’ माना जाता है.
- तुलसी की 108 परिक्रमा से पापों का नाश – इन दिनों में रोजाना तुलसी की 108 परिक्रमा करने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है. इसे लक्ष्मी कृपा प्राप्त करने का सरल उपाय भी माना गया है.
- गौसेवा और दीपदान का विशेष महत्व – गौमाता को 11 लोई खिलाने से पितृदोष दूर होता है और ग्रह मजबूत होते हैं. वहीं हर शाम 5 दीपक जलाने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बाधाएं दूर होती हैं.
- विष्णु-नरसिंह भक्ति से मिलेगा संपूर्ण फल – भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित कर ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करने और भगवान नरसिंह की पूजा करने से भय, शत्रु और कष्ट समाप्त होते हैं. इन अंतिम दिनों में की गई सच्ची भक्ति ‘कल्याणकारी झोली’ भरने जैसी मानी जाती है. जो जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कर सकती है.

