लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार चित्रकूट मंडल को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शनिवार को पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ कार्य विभाग की प्रस्तावित व निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए लगभग 84 करोड़ रुपये की लागत वाली 31 परियोजनाओं पर विस्तार से मंथन किया. इनमें पर्यटन विभाग की 27 परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें चित्रकूट की 15, बांदा की 6, हमीरपुर की 3 और महोबा की 3 परियोजनाएं हैं.

बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एक करोड़ रुपये तक की सभी निर्माणाधीन परियोजनाएं नवंबर तक हर हाल में पूरी की जाएं. उन्होंने कहा कि पर्यटन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि प्रत्येक स्थल की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना है. उन्होंने गुणवत्ता, समयबद्धता और जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया.

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चित्रकूट में प्रयागराज, बांदा और कौशांबी मार्गों पर भव्य थीम आधारित प्रवेश द्वार, बेरी पुलिया से शंख चौक तक पर्यटन विकास, रामघाट पर कथा स्थल, तुलसी घाट पर आरती स्थल, प्राणु बाबा आश्रम, लैना बाबा मंदिर, मारी माता मंदिर तथा बोड़ी पोखरी के सौंदर्यीकरण जैसी परियोजनाओं की समीक्षा की गई. इनसे चित्रकूट को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

बैठक में करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित ‘परंपरा’ वन स्टॉप सेंटर फॉर टूरिज्म एंड कल्चर परियोजना पर भी चर्चा हुई. यह केंद्र चित्रकूट की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को एक ही स्थान पर प्रस्तुत करेगा तथा पर्यटकों को पर्यटन संबंधी जानकारी और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा. इसके अलावा बांदा, महोबा और हमीरपुर के प्रमुख मंदिरों, ऐतिहासिक स्थलों और धार्मिक परिसरों के विकास, इंटरप्रिटेशन सेंटर, संरक्षण एवं पर्यटक सुविधाओं के विस्तार की योजनाओं की भी समीक्षा की गई. संस्कृति विभाग ने रामलीला परिसर, राम जानकी मंदिर, सोमनाथ मंदिर, खाकरा मठ और अन्य प्राचीन धरोहरों के संरक्षण संबंधी परियोजनाएं प्रस्तुत कीं, जबकि धर्मार्थ कार्य विभाग ने बड़ी भवानी मंदिर समेत कई प्राचीन मंदिरों के अनुरक्षण और विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी दी.

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बैठक के अंत में मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को नियमित स्थलीय निरीक्षण, सतत निगरानी और सभी परियोजनाओं को तय समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के पूरा होने से चित्रकूट मंडल में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान प्राप्त होगी.