देहरादून. शहरी विकास विभाग में क्लर्क, सफाई निरीक्षक और कर कर्मचारियों सहित कई कर्मचारियों को नियमों को ताक पर रखकर नगर निकायों में प्रभारी अधिशासी अधिकारी बनाने का मामला सामने आया है. नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने मुद्दे को उठाते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं. साथ ही युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की और यह भी कहा कि कांग्रेस युवाओं के हक की लड़ाई मजबूती के साथ लड़ेगी.

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नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, शहरी विकास विभाग में आखिर चल क्या रहा है? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उत्तराखंड के शहरी विकास विभाग में क्लर्क, सफाई निरीक्षक और कर कर्मचारियों सहित विभिन्न कर्मचारियों को नगर निकायों में प्रभारी अधिशासी अधिकारी (EO) का दायित्व सौंपा गया है. यदि ये रिपोर्टें सही हैं, तो यह कई गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं. जब नियमित अधिशासी अधिकारियों के पदों पर भर्ती उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से होनी चाहिए, तब इन पदों को आयोग के पास भेजने के बजाय प्रभार व्यवस्था के सहारे क्यों चलाया जा रहा है?

आगे उन्होंने कहा, सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रभार देने का आधार क्या था? क्या वरिष्ठता, सेवा नियम और पात्रता का पालन किया गया? किन मानदंडों के आधार पर इन अधिकारियों का चयन हुआ? क्या सभी पात्र कर्मचारियों को समान अवसर दिया गया? यदि सरकार और शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो इन सभी प्रभार नियुक्तियों की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए और पूरी चयन प्रक्रिया, पात्रता, वरिष्ठता सूची और आदेश सार्वजनिक किए जाएं.

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यशपाल आर्य ने ये भी कहा कि उत्तराखंड का युवा पूछ रहा है कि क्या अब अधिशासी अधिकारी बनने का रास्ता योग्यता, वरिष्ठता और नियमों से तय होगा, या फिर किसी और आधार पर? यदि सभी नियुक्तियां पूरी तरह नियमसम्मत हैं, तो सरकार पारदर्शिता के साथ सभी तथ्यों को सार्वजनिक करें. यदि कहीं भी अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित आदेश तत्काल निरस्त किए जाएं और नियमित भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए. उत्तराखंड के युवाओं का भविष्य समझौते का विषय नहीं हो सकता. कांग्रेस पारदर्शी भर्ती, समान अवसर और नियम आधारित प्रशासन की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ती रहेगी.