लखनऊ. अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी और पेट्रोल-डीजल के दाम को लेकर भाजपा पर करारा हमला बोला है. उन्होंने कहा, भाजपा की ‘धर्म’ और ‘धन’ दोनों राजनीति का अंत हो गया है. दुनिया भर में कच्चे तेल के दाम गिरने से पेट्रोल-डीज़ल के दामों में भारी कमी आई है और दूसरे देशों की पब्लिक को तेल के घटे दामों के रूप में लाभ मिला है, लेकिन इसके विपरीत भारत में भाजपा सरकार दाम नहीं घटा रही है, कंपनियों को लगातार फ़ायदा पहुंचाने में लगी है. भाजपा सरकार कंपनियों की सगी है जनता की नहीं.

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आगे अखिलेश यादव ने कहा कि भारत में तेल या किसी भी चीज़ के दाम का अपना अनोखा ‘भ्रष्ट अर्थशास्त्र’ है जो मांग-आपूर्ति से नहीं बल्कि भाजपाई कमीशनख़ोरी से चलता है, जो कंपनियों के मुनाफ़े से जुड़ा है. सामान्य शब्दों में कहें तो कंपनियों का प्रॉफिट-लाभ जितनी ज़्यादा होगा, भाजपा को कमीशन भी उतना ज़्यादा मिलेगा. इसीलिए हमारे यहां हर चीज़ के दाम बढ़ने या कुल मिलाकर कहें कि महंगाई बढ़ने का कारण भाजपा की कमीशनख़ोरी है, जिसका ख़ामियाज़ा आम जनता को महंगे तेल, परिवहन, यातायात, खाद्य पदार्थ व अन्य सभी सामान ख़रीद कर भुगतना पड़ रहा है.

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आगे अखिलेश यादव ने ये भी कहा कि भाजपा के जिन अनभिज्ञ, भोले-भाले समर्थकों को लगता था कि भाजपा ऐसा निकृष्ट कार्य नहीं कर सकती है, मंदिर-चोरी के बाद उनको भी समझ आ गया है कि भाजपाइयों के लिए ‘धन’ ही ‘धर्म’ है. अब तो भाजपा और उनके संगी-साथियों को देखकर लोग दरवाज़ा बंद कर ले रहे हैं. भाजपा की धर्म की राजनीति का अंत हो गया है, इसीलिए वो अब केवल ‘धन’ की राजनीति करेगी, इससे भ्रष्टाचार भी बेतहाशा बढ़ेगा और महंगाई भी क्योंकि भाजपा के जिन करोड़ों वोटों में कमी आई है, उन वोटों की कमी को भाजपा पैसे से खरीद कर पूरा करना चाहेगी, लेकिन धर्म के नाम पर की गई चोरी के पैसों को कोई नहीं लेना चाहेगा. यही ‘अधर्मी भाजपा’ की सबसे बड़ी चिंता है. भारत की धर्मभीरू जनता पाप के पैसों की हिस्सेदार नहीं बनेगी. ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी के खुलने की वजह से भाजपा की ‘धर्म’ और ‘धन’ दोनों राजनीति का अंत हो गया है। भाजपा अब कहीं की नहीं रही. जो भाजपा का साथी, वो रामघाती!