लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने लोकसभा से पारित पेपर लीक रोकथाम संबंधी विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल सख्त कानून बना देने से समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और पेपर लीक रोकने के प्रभावी उपायों पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए.
मायावती ने कहा कि पेपर लीक जैसे अपराधों के कारण लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है और कई छात्र तनाव में आकर आत्महत्या जैसे कदम तक उठा लेते हैं. ऐसे में सख्त सजा का प्रावधान स्वागत योग्य है, लेकिन अपराध होने के बाद कार्रवाई से ज्यादा जरूरी है कि ऐसी घटनाएं होने ही न पाएं.
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उन्होंने कहा कि पिछले कानून भी पेपर लीक रोकने में पूरी तरह सफल नहीं रहे, इसलिए सरकार को परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए. शिक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर किए बिना केवल नया कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा.
आगे बसपा प्रमुख ने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चे पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं. जबकि संपन्न परिवारों के बच्चों के पास निजी शिक्षा और अन्य संसाधनों के विकल्प उपलब्ध रहते हैं, इसलिए सरकार को सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने और सभी छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
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मायावती ने यह भी कहा कि संसद में विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान अधिकांश राजनीतिक दलों ने गंभीर बहस करने के बजाय एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि समस्या की जड़ पर काम नहीं किया गया तो नया कानून कितना प्रभावी साबित होगा. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके.


