लखनऊ. विधानसभा चुनाव होने में अब साल भर से भी कम समय है. ऐसे में सियासी माहौल गरमा गया है. पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर छींटाकशी में कोई कसर नहीं छोड़ रहे. दोनों पक्षों के बीच खुद को बेहतर बतानी की होड़ मची हुई है. इन सबके बीच योगी सरकार में मंत्री और सुभसपा सुप्रीमो ओपी राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. ओपी राजभर ने कहा, अखिलेश यादव जी ओम प्रकाश राजभर ने ट्वीट, एसी और पीसी करने के लिए सुभासपा नहीं बनाई है.

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आगे ओपी राजभर ने कहा, सच तो ये है कि पिछड़ा वर्ग और बहुजन समाज के नाम पर ठगी करने वालों ने अगर वाकई ईमानदारी दिखाई होती और पिछड़ा-अति पिछड़ा व बहुजन समाज के साथ बराबरी का व्यवहार किया होता- तो सुभासपा के पैदा होने की जरूरत ही नहीं थी. इसीलिए हमेशा कहता हूं, इनके पीडीए का मतलब है, ”पहला दावा अहिर” और वह भी सिर्फ सैफाई वाला.

आगे उन्होंने कहा, सपा की तरफ से आजमगढ़ का स्थानीय यदुवंशी युवक कभी सांसद नहीं बन सकता, नहीं तो ‘हाऊ कैन यू रोक’ वाले धर्मेन्द्र यादव की जगह मेरे आजमगढ़ का कोई ‘यदुवंशी लाल सांसद’ होता. वोट यदुवंशियों का लेना है, लेकिन कुर्सी सिर्फ ‘सैफई के नवाबों’ को मिलती है. बदायूं में आदित्य यादव और कन्नौज में डिम्पल यादव की जगह कोई राजभर, चौहान, निषाद, बिंद, केवट, मल्लाह, कश्यप, प्रजापति, पाल, लोहार, बढ़ई, कहार, धीमर, कुशवाहा, मौर्य, शाक्य, धोबी, सैनी, गूजर जैसी जाति का सांसद बनता.

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आगे ओपी राजभर ने कहा, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सपा की तरफ से चेहरा अखिलेश यादव नहीं बल्कि हक मांगने पर निकाली गई वीरंगाना स्वर्गीय फूलन देवी की बहन रुक्मिणी निषाद होतीं. सच बोलने वाली पूजा पाल पार्टी से बाहर नहीं निकाली जातीं. जिस पार्टी में केवल ‘सैफई के नवाब’ लोग ही कुर्सी पर बैठने की हैसियत रखते हों और बाकियों को दरी मिलती है. भला उस पार्टी में गैर यादव पिछड़ा, अति पिछड़ा और बहुजन समाज की जातियों के लिए जगह कहां होगी? कुर्सी पर जगह होती तो ओम प्रकाश राजभर को सुभासपा बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती. जय सुहेलदेव, जय सुभासपा.