लखनऊ. इंदिरानगर में पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो दिन के उजाले में बंद मकानों की रेकी करता था और मौका मिलते ही ताला तोड़कर घर साफ कर देता था. पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर चोरी की चार घटनाओं का खुलासा किया है. पुलिस आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है.
कार-बाइक बनीं रेकी का हथियार
पुलिस के मुताबिक गिरोह दिन में चार पहिया और दो पहिया वाहनों से मोहल्लों में घूमकर ऐसे मकान तलाशता था, जिन पर ताला लगा हो. इसके बाद आसपास कोई व्यक्ति मौजूद है या नहीं, इसकी पुष्टि की जाती थी. मौका साफ मिलते ही ताला तोड़ा जाता और कुछ ही समय में आभूषण औऱ नकदी लेकर आरोपी फरार हो जाते थे. चोरी के बाद माल को आगे बेच दिया जाता और रकम आपस में बांट ली जाती थी.
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चार वारदातों से खुला गिरोह का कनेक्शन
इंदिरानगर इलाके में 8 जून, 12 जून, 31 जुलाई और 13 अगस्त को दिन के समय बंद मकानों में चोरी हुई थी. लगातार सामने आ रही घटनाओं को देखते हुए पुलिस ने टीम गठित कर जांच शुरू की. 15 अगस्त को पुलिस को बादशाहखेड़ा नहर के पास कुछ संदिग्धों के मौजूद होने की सूचना मिली. टीम ने घेराबंदी कर पांच संदिग्धों को पकड़ा. पूछताछ में चारों का चोरी की घटनाओं का कनेक्शन सामने आया. जिसके बाद पुलिस ने अर्जुन पाण्डेय उर्फ ईशु पाण्डेय, मोहम्मद सिराज उर्फ राजू, बबलू उर्फ मनोज, अरविन्द यादव उर्फ धरविन्द्र यादव और अखिलेश कुमार गौतम को गिरफ्तार कर लिया.
चोरों का माल खरीदने वाला ज्वेलर भी गिरफ्तार
पूछताछ में सामने आया कि चोरी के आभूषण दुर्गा शंकर वर्मा को बेचे जाते थे. इसके बाद पुलिस ने चौक क्षेत्र में ज्वैलरी की दुकान से उसे भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के अनुसार दुर्गा शंकर सोना गलाने का काम करता था. उसके पास से चोरी का माल बरामद किया गया है. इस कार्रवाई ने चोरी की पूरी चेन को सामने ला दिया है. मतलब रेकी से लेकर चोरी और फिर चोरी के माल को खपाने तक.
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52 हजार नकद और जेवर बरामद
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 52,400 रुपये नकद, पीली और सफेद धातु के आभूषण, सिक्के और अन्य सामान बरामद किया है. इसके अलावा चोरी में इस्तेमाल हुंडई ओरा कार और हीरो स्प्लेंडर बाइक भी पुलिस ने बरामद की है. चोरी में इस्तेमाल होने वाले औजारों में छैनी, प्लास, सब्बल, हथौड़ी और कुल्हाड़ी भी बरामद हुई हैं.
गिरोह के कई सदस्यों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों में कई के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं. अकेले बबलू उर्फ मनोज के खिलाफ चोरी और चोरी का माल रखने से जुड़े कई मुकदमे दर्ज बताए गए हैं. अन्य आरोपियों का भी आपराधिक इतिहास सामने आया है. इंदिरानगर पुलिस की इस कार्रवाई ने बंद मकानों की सुरक्षा को लेकर एक अहम सवाल खड़ा किया है. गिरोह के सदस्य किसी सुनसान मकान का ताला देखकर सीधे वारदात नहीं करते थे, बल्कि पहले रेकी कर यह सुनिश्चित करते थे कि घर में कोई नहीं है.


