US-Iran War: अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। लगातार 12वीं रात अमेरिका ने ईरान पर हमला किया। इस बार खुजेस्तान, बुशेहर, होर्मोजगान और इलाम प्रांतों में कई जगह मिसाइल और हवाई हमले हुए। वहीं अमेरिकी सेना ने मंगलवार को पहली बार B-1 लांसर लॉन्ग-रेंज बॉम्बर का इस्तेमाल करते हुए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, 12 दिन पहले जंग दोबारा शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब B-1 बॉम्बर को मिशन पर भेजा गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के ब्रिज और पावर प्लांट्स को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। इसके बाद ईरान भड़क गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान पर किसी भी हमले का जवाब उसी भाषा में दिया जाएगा। राघची ने साफ कहा कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ तो उसका जवाब “आंख के बदले आंख” की नीति के तहत दिया जाएगा।

अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा-हमारा डिफेंस सिद्धांत साफ़ है: आँख के बदले आँख। ईरान के खिलाफ़ कोई भी हमला, जिसमें हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है, एक मज़बूत और निर्णायक जवाब देने के लिए मजबूर करेगा। जो लोग ऐसे हमले में हिस्सा लेते हैं, चाहे किसी भी तरह का सपोर्ट हो, उन्हें भी सही टारगेट माना जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे हमलों में किसी भी तरह की मदद करने वाले देश या पक्ष भी ईरान के वैध निशाने होंगे। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश करता है, तो अमेरिका उसके पुलों और पावर प्लांट को निशाना बना सकता है।

हमला हुआ अमेरिका के सहयोगियों पर गिरेगी गाज

ईरान की सर्वोच्च सैन्य कमान और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल सैयद माजिद मौसवी ने भी अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान के ब्रिज या पावर प्लांट्स को निशाना बनाया गया तो क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “अगर हमारे पावर प्लांट और ब्रिज पर हमला हुआ तो उसके परिणाम तुरंत दिखाई देंगे।

अमेरिका ने ईरान पर 12वीं रात एयरस्ट्राइक की

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसकी सेना ने ईरान पर लगातार 12वीं रात एयरस्ट्राइक पूरी की। इन हमलों में ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज, समुद्री सैन्य क्षमताओं, तटीय निगरानी केंद्रों और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया। CENTCOM के मुताबिक, इस महीने अब तक ईरान के दर्जनों सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। अमेरिका ने यह भी दावा किया कि उसने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी लागू कर रखी है। इसके तहत 9 व्यावसायिक जहाजों का रास्ता बदला गया और एक जहाज को ईरानी बंदरगाह में आने-जाने से रोका गया।

अमेरिका ने ईरान पर हमले में पहली बार उतरा B-1 बॉम्बर

ईरान पर लगातार हमलों के बीच अमेरिका ने पहली बार B-1 लांसर बॉम्बर का इस्तेमाल किया है। माना जा रहा है कि इससे अमेरिकी सैन्य अभियान और तेज हो सकता है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को पहली बार B-1 लांसर लॉन्ग-रेंज बॉम्बर का इस्तेमाल करते हुए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हमला किया। B-1 बॉम्बर को अमेरिका के सबसे ताकतवर रणनीतिक बमवर्षकों में गिना जाता है। यह एक साथ 24 दो हजार पाउंड के बम या दर्जनों क्रूज मिसाइलें ले जाने में सक्षम है। कम ऊंचाई पर आवाज की रफ्तार से भी तेज उड़ान भरने वाला यह विमान किसी भी अमेरिकी बॉम्बर की तुलना में सबसे ज्यादा हथियार ले जा सकता है।

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