Dharm Desk – सनातन धर्म में शिखा (चोटी) रखना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व से जुड़ी मान्यता है. प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनि और विद्वान सिर के मध्य भाग में शिखा रखते आए है. इसे सहस्रार चक्र का स्थान माना जाता है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र कहलाता है, मान्यता है कि शिखा रखने से यह ऊर्जा सक्रिय रहती है. जिससे ध्यान, एकाग्रता और मानसिक संतुलन मजबूत होता है.

सहस्रार चक्र और ऊर्जा का संबंध

सिर के मध्य भाग में स्थित सहस्रार चक्र मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र है, इसे ब्रह्मरंध्र के ठीक ऊपर माना है. जहां आत्मा का निवास बताया है. शिखा इसी स्थान पर रखी जाती है. जिससे इस ऊर्जा बिंदु को संरक्षित और सक्रिय रखने में मदद मिलती है, यही कारण है कि साधना और ध्यान में शिखा का विशेष महत्व बताया है.

सुश्रुत संहिता में शिखा का उल्लेख मिलता है

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ सुश्रुत संहिता में सिर के ऊपरी मध्य भाग को ‘अधिपति मर्म’ कहा गया है. यह वह स्थान है, जहां शरीर की प्रमुख नाड़ियां और संधियां मिलती है माना जाता है कि इस स्थान पर चोट लगने से जीवन को खतरा हो सकता है. इसलिए शिखा इस संवेदनशील भाग की रक्षा करने का भी एक माध्यम मानी है.

शिखा को लेकर क्या कहते हैं शास्त्रों के नियम

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शिखा हमेशा सिर के मध्य भाग में ही रखनी चाहिए. चोटी का आकार गाय के खुर के समान बताया है. पूजा, दान-पुण्य और भोजन के समय शिखा में गांठ बांधने का नियम है, जबकि सामान्य कार्य करते समय इसे खुला रखा जाता है. यह नियम अनुशासन और परंपरा दोनों का प्रतीक माने जाते हैं.

चोटीधारी और जटाधारी में अंतर

प्राचीन समय में समाज में चोटीधारी और जटाधारी का अलग-अलग महत्व था. जो लोग कर्मकांड और संस्कार कराते थे, वे चोटीधारी कहलाते थे. जबकि धर्म, शिक्षा और दीक्षा देने वाले जटाधारी. समय के साथ यह विभाजन बदल गया, लेकिन शिखा की परंपरा आज भी कई लोगों द्वारा निभाई जाती है.

मुंडन संस्कार और शिखा का संबंध होता है

शिखा रखने की परंपरा मुंडन संस्कार से जुड़ी होती है. जन्म के बाद पहले साल के अंत में या तीसरे, पांचवें या सातवें वर्ष में बाल उतारे जाते हैं. जिसे चूड़ाकर्म संस्कार कहा जाता है. इसी समय शिखा रखने का निर्णय लिया जाता है. वैष्णव परंपरा में मुंडन के बाद शिखा रखना अनिवार्य का गया है, जबकि शैव परंपरा में यह आवश्यक नहीं है.

आस्था और विज्ञान का संगम

आधुनिक विज्ञान के अनुसार, सिर के जिस स्थान पर शिखा रखी जाती है, वहां मस्तिष्क की कई महत्वपूर्ण नसें मिलती हैं. यह क्षेत्र शरीर के नियंत्रण और संतुलन से जुड़ा होता है. ऐसे में शिखा इस हिस्से को बाहरी तापमान और प्रभाव से बचाने का काम भी करती है.