Dharm Desk – जैसे-जैसे अधिक मास खत्म होने के करीब आ रहा है, वैसे-वैसे मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ, व्रत और कथा का आयोजन तेजी से बढ़ गया है. खासतौर पर सत्यनारायण भगवान की कथा का महत्व इन दिनों कई गुना बढ़ जाता है. अधिकमास का पावन समय अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. 17 मई से शुरू हुआ यह पुरुषोत्तम मास अब समाप्ति की ओर है और केवल 10–11 दिन ही शेष बचे है. हिंदू धर्म में यह समय भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने का सुनहरा अवसर होता है. मान्यता है कि जो साधक इस अवधि में भक्ति करता है. उसे सामान्य दिनों से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस कथा का पाठ करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

सत्यनारायण कथा क्यों है खास
अधिक मास में सत्यनारायण कथा करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते है. मान्यता है कि इस कथा के श्रवण और पाठ से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. जिन लोगों के कार्य बार-बार रुकते हैं. जीवन में बाधाएं आती है. उनके लिए यह कथा विशेष फलदायी मानी गई है.
100 गुना मिलता है पुण्य
स्कंद पुराण में बताया गया है कि अधिकमास में किए गए दान, जप, तप और पूजा का फल 100 गुना बढ़कर मिलता है यही कारण है कि इस समय सत्यनारायण कथा, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और जरूरत मंदों को दान करना अत्यंत शुभ माना गया है.
तीन साल बाद मिलेगा मौका
अधिकमास हर तीन साल में एक बार आता है. ऐसे में यह अंतिम 10–11 दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे है. जो लोग अब तक पूजा या कथा नहीं कर पाए हैं. उनके लिए यह आखिरी मौका है कि वे भगवान विष्णु की आराधना कर जीवन में सुख का आशीर्वाद प्राप्त करें.
क्या करें और क्या न करें
इन दिनों में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान, व्रत, जप और कथा करना शुभ होगा. वहीं विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्यों की शुरु आत से बचने की सलाह दी जाती है. अधिकमास को आत्म शुद्धि और भक्ति का महीना माना है. जिसमें किया गया हर छोटा प्रयास भी बड़ा फल देता है.

