India GDP Growth: भारत की तिमाही GDP ग्रोथ को लेकर जारी बहस अब राजनीतिक और आर्थिक गलियारों से निकलकर शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा तक पहुंच गई है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग द्वारा GDP के आंकड़ों पर सवाल उठाए जाने के बाद अब शर्मा ने भी भारत की आर्थिक वृद्धि और आम लोगों की जमीनी स्थिति के बीच कथित अंतर को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

7.8% GDP ग्रोथ पर शंकर शर्मा का ‘रियल फील’ सवाल

शंकर शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि उन्हें GDP ग्रोथ के आंकड़ों की बहस में पड़ने में खास दिलचस्पी नहीं है। उनका फोकस इस बात पर है कि GDP Growth का आम लोगों को ‘Real Feel’ कितना हो रहा है।

उनके मुताबिक, कागजों पर भारत करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है और 7% से ज्यादा की रफ्तार से बढ़ रहा है, लेकिन आम जनता को इसकी वास्तविक ग्रोथ महज 2-3% जैसी महसूस होती है।

ट्रैफिक, तनाव और जीवन की गुणवत्ता पर उठाए सवाल

शर्मा ने भारत में Quality of Life को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोगों में तनाव दिखाई देता है, सड़कों पर ट्रैफिक और अव्यवस्था बढ़ी है और शहरों की स्थिति उस आर्थिक ताकत के अनुरूप नजर नहीं आती, जिसका दावा GDP के आंकड़े करते हैं। उनका कहना है कि भारत के कई शहर और गांव आज भी करीब 100 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था जैसे दिखते हैं, न कि 4 ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था जैसे।

यूरोप की GDP से भारत की तुलना

शंकर शर्मा ने भारत की तुलना यूरोप से करते हुए कहा कि वहां आधिकारिक GDP ग्रोथ भले ही 2-3% हो, लेकिन लोगों को आर्थिक समृद्धि का ‘रियल फील’ ज्यादा मिलता है। उनके मुताबिक, यूरोप में साफ-सफाई, बेहतर व्यवस्था, खुशहाल माहौल और गुलजार कैफे-रेस्टोरेंट जैसी चीजें लोगों की जीवन गुणवत्ता को बेहतर दिखाती हैं।

हालांकि, GDP और Quality of Life अलग-अलग आर्थिक पैमाने हैं, इसलिए ‘Real Feel GDP’ को आधिकारिक GDP का विकल्प नहीं माना जा सकता। फिर भी शर्मा की टिप्पणी ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के साथ आम नागरिकों तक उसके लाभ पहुंचने पर नई बहस छेड़ दी है।

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