भिवानी। अजय सैनी। हरियाणा के नारनौंद, हांसी, तोशाम और बवानीखेड़ा विधानसभा क्षेत्रों के किसानों और ग्रामीणों के सामने सिंचाई और पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सुंदर ब्रांच और सुंदर सब-ब्रांच नहर में पानी की कटौती और असमान वितरण के विरोध में किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। बास गांव से लेकर नहर के अंतिम छोर पर स्थित कंवारी गांव तक किसान सुंदर ब्रांच नहर बचाओ किसान संघर्ष समिति और अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले पिछले 55 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में किसानों की ओर से सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी को मांगपत्र सौंपा गया।

इस अवसर पर पूर्व छात्र नेता उमेश भारद्वाज ने कहा कि सुंदर ब्रांच नहर की लगातार हो रही उपेक्षा के कारण 70 से अधिक गांवों के किसान और ग्रामीण परेशान हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का भूजल पूरी तरह खारा है, जिसके कारण खेती मुख्य रूप से नहरी पानी पर निर्भर है। लंबे समय से नहरों में पर्याप्त पानी नहीं आने के कारण गांवों में बनाए गए वॉटर टैंक तक सूख चुके हैं। ग्रामीणों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है, वहीं सिंचाई के अभाव में फसलों को भी नुकसान हो रहा है।

42 दिन के अंतराल पर कुछ दिनों के लिए छोड़ा जा रहा पानी

उमेश भारद्वाज ने कहा कि पहले सुंदर ब्रांच नहर महीने में करीब दो सप्ताह नियमित रूप से चलती थी, लेकिन अब स्थिति काफी खराब हो गई है। किसानों के अनुसार अब 42-42 दिनों के अंतराल पर महज कुछ दिनों के लिए पानी छोड़ा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी कागजों में रोटेशनल प्रोग्राम बनाकर खानापूर्ति कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर किसानों को उनके हिस्से का पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि जिस सेक्शन को 950 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, वहां महज 465 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है। इसके कारण नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि भिवानी शहर के साथ-साथ कायला, धारेडू सहित विभिन्न गांवों में भी बनी हुई है।

किसानों ने रखीं कई मांगें

किसानों की ओर से सौंपे गए मांगपत्र में नहर की रोटेशन व्यवस्था में सुधार करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। इसके अलावा अंटा हेड की क्षमता बढ़ाने, मौहला हेड पर 2500 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने, मिथाथल फीडर को 600 क्यूसेक और जूई-निगाना फीडर को 800 क्यूसेक पानी देने की मांग की गई।

किसानों ने नहर की टेल तक सफाई कराने और पर्याप्त पानी पहुंचाने, भाखड़ा जल विवाद का समाधान करने, अवैध डिस्ट्रीब्यूटरी चैनलों पर रोक लगाने तथा पानी चोरी के खिलाफ राजस्थान की तर्ज पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी रखी।

मांगें नहीं मानी तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सिंचाई विभाग और सरकार ने उनकी मांगों पर तत्काल संज्ञान लेकर ठोस कदम नहीं उठाए तो 70 गांवों के किसान एकजुट होकर आंदोलन को जिला और राज्य स्तर पर बड़ा रूप देने के लिए मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि सिंचाई और पेयजल की समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ सकती है।

धरने के 55वें दिन अध्यक्षता सरदारा राम यादव ने की। इस दौरान जगदीश पूर्व सरपंच, प्रहलाद यादव, राजेश कूगड़ तहसील प्रधान, रामोतार भाकर, धर्मवीर पिलानिया, इंद्र ओला, हवासिंह शर्मा, हरफूल सिंह, कप्तान मोर, वीरेंद्र, रामदयाल, पृथ्वी बास, धर्मवीर सिवाड़ा, प्रेम, जयभगवान, रामनिवास गहलावत सहित अन्य किसान मौजूद रहे।