नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के गुट की एक कॉन्फ्रेंस शुक्रवार से शुरू होकर आज समाप्त हो गयी. कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य देश को एक बार फिर हिंदू राष्ट्र के तौर पर पहचान दिलाने का था. नेपाल में हाल ही में मधेश और तराई क्षेत्रों विशेषकर सुनसरी जिले की घटनाओं में हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद देश को दोबारा ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करने की मांग फिर से तेज हो गई है.
नेपाल जो पहले हिंदू राष्ट्र था और फिर धर्मनिरपेक्ष बन गया वहां एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र के तौर पर पहचान दिलाने की मांग उठने लगी है.
नेपाल के पूर्व पीएम देउबा ने कहा कि मैं हिंदू हूं, सनातन धर्म ही देश की पहचान हो. देउबा ने कहा, सनातन धर्म को ही नेपाल की पहचान बनाएं. प्रस्ताव में हिंदू, बौद्ध, किरात और प्रकृति-आधारित धार्मिक परंपराओं के संरक्षण समेत सभी धर्म समुदायों की आजादी, सहिष्णुता और सामाजिक सद्भाव पर भी जोर दिया गया.
देउबा गुट ने कहा कि नेपाल की पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाएं उसकी राष्ट्रीय पहचान का अहम हिस्सा हैं. देउबा नेतृत्व में नेकां गुट के 14वें राष्ट्रीय सम्मेलन में इसे देश की राष्ट्रीय पहचान के रूप में आगे बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया. हालांकि, इस बयान से सियासी माहौल गरमा गया है.
सम्मेलन में संविधान को संबोधित करते हुए कहा गया कि वर्तमान संविधान में जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप आवश्यक बदलाव किये जाने चाहिए. किसी भी बदलाव को सभी संबंधित समूहों के साथ बातचीत के माध्यम से ही किया जाना चाहिए.
सम्मेलन के समापन समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने कहा कि ‘मैं हिंदू हूं’ के नारे के साथ अपनी राजनीति की दिशा स्पष्ट कर दी. नेपाल के पूर्व पीएम ने कहा, मैं किसी का विरोधी नहीं हूं. लेकिन बस मुझे यह कहने का अधिकार हो कि मैं हिंदू हूं.
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