पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ग्रामीण और शहरी इलाकों में घरों के ऊपर से गुजरने वाले बिजली के हाई-टेंशन तारों का मुद्दा गरमा गया। बड़हरा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने इस समस्या को उठाते हुए सरकार से मांग की कि इन तारों को हटाने के लिए जनता पर थोपी गई वित्तीय बाध्यता (शुल्क) को तत्काल समाप्त किया जाए।

​मंत्री का तर्क: बाद में बने हैं घर

​विधायक के सवाल का जवाब देते हुए ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि अधिकांश मामलों में बिजली के तार पहले से लगे हुए थे और मकानों का निर्माण बाद में किया गया है। उन्होंने कहा कि विभागीय नियमों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से तारों को शिफ्ट करने के लिए निर्धारित राशि का भुगतान करना अनिवार्य है। फिलहाल सरकार के पास इन्हें मुफ्त में हटाने की कोई योजना नहीं है।

​पक्ष-विपक्ष का एकजुट प्रदर्शन

​मंत्री के इस जवाब से सदन में असंतोष फैल गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ओर के विधायकों ने सुर में सुर मिलाते हुए जनता से पैसे लेने की प्रक्रिया को गलत ठहराया। विधायक अपनी सीटों पर खड़े होकर कार्रवाई की मांग करने लगे। विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, सरकार को अपनी जिम्मेदारियों से भागना नहीं चाहिए। जनहित के सवालों को इस तरह टाला जाना उचित नहीं है।

​स्पीकर का हस्तक्षेप और आश्वासन

​सदन में बढ़ते हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सदस्यों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार को इस मुद्दे की गंभीरता से समीक्षा करने का निर्देश दिया। स्पीकर ने घोषणा की कि होली के अवकाश के बाद मंत्री इस पूरे मामले पर विस्तृत समीक्षा बैठक करेंगे, ताकि कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके।