अमृतसर : नवजोत कौर सिद्धू को पार्टी से निकालने के बाद वह अपने जीवन में बदलाव लाने की सोच रही है। हाल ही में संत रामपाल जी महाराज के आश्रम गईं। आश्रम की व्यवस्था और वहां हो रहे काम को देखने के बाद उन्होंने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि यहां आकर उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे वह धरती पर स्वर्ग में घूम रही हैं। उन्होंने कहा कि वह हर दिन कलियुग में सतयुग का सपना देखते हैं और आज वह सपना सच होता दिख रहा है। इस दौरान नवजोत कौर सिद्धू ने पॉलिटिक्स और अध्यात्म की तुलना करते हुए कहा कि उनका मानना है कि संतों की सेवा पॉलिटिक्स से कहीं बड़ी है और पॉलिटिक्स खत्म होने के बाद संतों की सेवा महान है।
उन्होंने कहा कि अगर राजनीतिक लोग साइड हो जाएं तो संत महाराज ही इस धरती का ख्याल रख सकते हैं, क्योंकि आज के राजनीतिक लोग अपनी पहचान भूल गए हैं। उन्होंने कहा कि पुराने समय में राजा-महाराजा अपने से ऊपर ब्राह्मणों को बैठाते थे, जो उन्हें सच्चाई के रास्ते को दिखाते थे। उन्हें इस बात का अफसोस है कि आज जब कोई कुर्सी पर बैठता है तो उसे लगता है कि शायद वह खुद कुछ बहुत बड़ा बन गया है। भगवान अगर किसी को कुर्सी देते हैं, तो काम करने के लिए देते हैं। उन्होंने कहा कि असली ‘कुर्सी’ तो इन संतों के पास है, जो लोगों को सच्चाई के रास्ते पर ले जा रहे हैं।

बिना दहेज की शादी की तारीफ
जानकारी हो कि आश्रम में हुए 7 जोड़ों के सामूहिक विवाह हुआ था, जिसे देखकर नवजोत कौर सिद्धू बहुत प्रभावित हुईं। उन्होंने अपने परिवार वालों के बारे में भी बताया कि उनकी, उनकी बेटी और बहू की शादियां भी इसी तरह सादगी से हुईं हैं। उन्होंने कहा कि कन्यादान धरती पर सबसे बड़ा दान है और इस आश्रम में पुरुष और महिला को बराबर का दर्जा दिया जाता है, जो समाज के लिए एक बड़ी मिसाल है।
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