Donald Trump On Strait of Hormuz: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दोस्तों से गच्चा मिलने के बाद भड़के डोनाल्ड ट्रंप ने भड़ास निकाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम सबसे शक्तिशाली देश हैं। हमारे पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है। हमें किसी की जरूरत नहीं है। हम अकेले ही ईरान को हराएंगे। Hormuz Strait को फिर से खोलने में मदद करने के लिए अमेरिकी सहयोगियों से की गई राष्ट्रपति ट्रंप की अपील को चुप्पी या सीधे तौर पर अस्वीकृति मिलने के एक दिन बाद उन्होंने अपनी नारजगी जाहिर की है।

बता दें कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग का आज 18वां दिन है। हमले के कारण ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। इससे पूरे विश्व में तेल और गैस सप्लाई की कमी हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए जापान-ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया (Japan-Australia and South Korea) समेत कई नाटो सदस्यों से मदद मांगी थी। जिसपर कई देशों ने ‘No’ कह दिया है।

Donald Trump ने मंगलवार को कहा कि वाशिंगटन को रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित करने के लिए किसी भी सहायता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने  कहा कि, ‘हमें किसी की जरूरत नहीं है, हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं। हमारे पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात की आलोचना दोहराई कि NATO गठबंधन के सदस्य होने और सामूहिक रक्षा के विचार के बावजूद अमेरिका की मदद नहीं की जा रही। उन्होंने इस अपील को और तेज करते हुए सहयोगी देशों को चेतावनी दी कि निगेटिव प्रतिक्रिया नाटो के लिए  फ्यूचर में बहुत बुरा हो सकता है।

ट्रंप के इन दोस्तों ने कहा- No
ट्रंप के आग्रह को जर्मनी, स्पेन और इटली समेत ऑस्ट्रेलिया, जापान ने अस्वीकार कर दिया और कहा कि उनके पास होर्मुज में युद्धपोत भेजने की तत्काल कोई योजना नहीं है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि युद्ध शुरू करने से पहले वाशिंगटन या इजराइल ने बर्लिन से बात नहीं की थी। उन्होंने कहा कि हमें संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ या नाटो से स्वीकृति नहीं मिली है। इन देशों के इनकार को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मैं उन्हें जबरदस्ती अपने साथ शामिल करने की कोशिश नहीं करता, क्योंकि मेरा रवैया यही है कि हमें किसी की जरूरत नहीं है।

जापान का दो टूक जवाब
सबसे बड़ा झटका टोक्यो से लगा. जापान सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह होर्मुज में किसी भी तरह के समुद्री सुरक्षा अभियान (Maritime Security Operations) पर विचार नहीं कर रही है। जापानी प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि उन्हें अभी तक अमेरिका से आधिकारिक अनुरोध नहीं मिला है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में अपनी नौसेना भेजना संभव नहीं है। जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान और खाड़ी देशों पर निर्भर है, ऐसे में वह अमेरिका के लिए ईरान से सीधे टकराव मोल लेने के मूड में नहीं है।

ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया ने भी खींचे हाथ
ऑस्ट्रेलिया, जिसे प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का सबसे वफादार साथी माना जाता है, उसने भी ट्रंप की मांग को ठुकरा दिया है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने स्पष्ट किया कि वे होर्मुज में अपना युद्धपोत नहीं भेजेंगे। वहीं, दक्षिण कोरिया ने थोड़ी कूटनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया लेकिन मंशा साफ कर दी। सियोल ने कहा कि वे इस अनुरोध की ‘बारीकी से समीक्षा’ करेंगे, लेकिन फिलहाल युद्धपोत भेजने की कोई योजना नहीं है। ट्रंप की रणनीति हमेशा ‘अमेरिका फर्स्ट’ की रही है, लेकिन होर्मुज संकट में उनकी यह रणनीति उन पर ही भारी पड़ती दिख रही है।

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