सहरसा। बेमौसम आंधी, तूफान और ओलावृष्टि ने सहरसा के किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में बिछी बर्बाद फसलों के मुआवजे और प्रशासन की सुस्ती के खिलाफ अब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। आगामी 28 मार्च को सहरसा की धरती पर एक विशाल महाधरना आयोजित होने जा रहा है, जिसकी तैयारियों ने जिले का सियासी पारा गर्मा दिया है।

​प्रशासन पर आंकड़ों की बाजीगरी का आरोप

​राजद विधायक डॉ. गौतम कृष्ण ने इस महाधरने की घोषणा करते हुए सीधे तौर पर जिला प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि अन्नदाताओं के साथ हो रहा अन्याय अब बर्दाश्त से बाहर है। डॉ. कृष्ण का आरोप है कि धरातल पर फसलें 100 प्रतिशत नष्ट हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी कागजों पर क्षति का सही आकलन करने के बजाय उसे कम करके आंक रहे हैं। इस लापरवाही के चलते हजारों वास्तविक पीड़ित किसान सरकारी राहत से वंचित हो रहे हैं।

​सर्वे में धांधली और पारदर्शिता का अभाव

​राजद जिलाध्यक्ष प्रो. मो. ताहिर ने तीखे सवाल दागते हुए कहा कि जब बर्बादी पूरी है, तो सरकार केवल 50 प्रतिशत नुकसान दिखाकर राहत की राशि में कटौती क्यों कर रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वे की प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी है और केवल चयनित लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इससे आम किसान ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

​सड़क से सदन तक हक की लड़ाई

​पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया है धरना तो अंगड़ाई है, आगे बहुत लड़ाई है। राजद नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई केवल मुआवजे की नहीं, बल्कि किसान के सम्मान की है। उनकी मुख्य मांग है कि सर्वे को दोबारा निष्पक्ष रूप से कराया जाए और बिना किसी भेदभाव के हर प्रभावित किसान को पूर्ण मुआवजा मिले। अब सभी की निगाहें 28 मार्च के इस बड़े प्रदर्शन पर टिकी हैं।