लखनऊ। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के रामभक्ति का स्वांग रच रहे वाले बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि हमारी आस्था को स्वांग कहने पर हम इनसे ‘मानहानि’ की मांग भी कर सकते थे। पर जिनका स्वयं का कोई ‘मान’ नहीं, उनके साथ हमें बेहद सहानुभूति है। ये RAC DCM प्रतीक्षारत रहकर कुर्सी देखकर गुनगुना रहे है।

अखिलेश ने किया पलटवार

अखिलेश यादव ने केशव मौर्य के बयान का जवाब देते कहा कि हमारी आस्था को स्वांग कहने पर हम इनसे ‘मानहानि’ की माँग भी कर सकते थे, पर जिनका स्वयं का कोई ‘मान’ नहीं है और जो अपनी पार्टी में ही सदैव ‘हानि-ही-हानि’ के शिकार हुए हैं उनके साथ हमें बेहद सहानुभूति है। अगर स्टूल भी छिन गया तो कहाँ जाएंगे? दरअसल वो अपनी पार्टी की उस सोच के बारे में बात कर रहे हैं, जिसके मुखिया जी बस स्वांग रचकर ही इन्हें हटाकर कुर्सी पर क़ाबिज़ हैं और ये RAC DCM प्रतीक्षारत रहकर कुर्सी देखकर गुनगुना रहे है, हम इंतज़ार करेंगे तेरा… बाक़ी जनता समझदार है।

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क्या है पूरा मामला

बता दें कि केशव प्रसाद मौर्य ने भगवान राम वाले पोस्ट सपा की नीयत पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि भाजपा के भय से पहले मंदिर बनवाना और अब प्रभु श्रीरामलला की मूर्ति लगवाने की चर्चा करना, यह समाजवादी पार्टी की ‘अवसरवादी’ राजनीति का नया चेहरा है। विडंबना यह है कि जिस सपा और सपाइयों के दामन पर रामभक्तों के खून के छींटे लगे हों, वे आज रामभक्ति का स्वांग रच रहे हैं।

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यदि वास्तव में आस्था का सम्मान होता और नीयत सही होती तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बनी ईदगाह को हटाकर भव्य मंदिर निर्माण की बात करते और बाबरी समर्थकों के खिलाफ भी आवाज उठाते। दुविधा में फंसे सपा बहादुर और उनकी सपा न तो रामभक्तों का विश्वास पाएगी और न ही अपना कथित ‘वोट बैंक’ बचा पाएगी। 2027 में इनको न तो हिंदू मिलेगा और न मुसलमान, मिलेगा तो केवल सैफ़ई में स्थान।