नई दिल्ली: प्रशासनिक लापरवाही और कानून की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कड़कड़डूमा की सत्र अदालत ने एमसीडी (MCD) के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया है। अदालत ने यह सख्त कदम तब उठाया, जब निर्माण रोकने के स्पष्ट न्यायिक आदेशों के बावजूद एक पांच-मंजिला अवैध इमारत का निर्माण जारी रहने दिया गया। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि न्यायालय के आदेशों की सीधी अवहेलना भी है। सूत्रों के अनुसार, अदालत अब यह जानना चाहती है कि जब पहले ही निर्माण पर रोक लगाई जा चुकी थी, तो फिर कैसे और किन अधिकारियों की जिम्मेदारी में यह अवैध निर्माण पूरा हुआ।

डिस्ट्रिक्ट जज संदीप कुमार शर्मा ने 1 अप्रैल को पारित आदेश में कहा कि निगम अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी का घोर उल्लंघन किया है। अदालत ने याद दिलाया कि उसने 9 फरवरी को ही अवैध निर्माण को तुरंत रोकने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण जारी रहा। याचिकाकर्ता द्वारा पेश की गई तस्वीरों से स्पष्ट हुआ कि आदेश के बाद भी उस स्थान पर पूरी पांच-मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे न्यायिक आदेशों की खुली अवहेलना करार दिया है। अब अदालत ने संबंधित अधिकारियों को तलब कर उनसे जवाब मांगा है कि आखिर रोक के बावजूद निर्माण कैसे जारी रहा।

अदालत ने MCD को लगाई फटकार

अदालत ने साफ कहा कि निगम अधिकारी इस मामले से अनजान होने का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि जब निर्माण रोकने के शुरुआती आदेश दिए गए थे, तब एमसीडी के वकील खुद मौके पर मौजूद थे, ऐसे में विभाग की अनभिज्ञता का तर्क स्वीकार्य नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए डिस्ट्रिक्ट जज संदीप कुमार शर्मा ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने भवन विभाग (शाहदरा साउथ जोन) के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का आदेश दिया है।

अब MCD ने दायर की रिपोर्ट

अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि आगे किसी भी तरह की न्यायिक आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने स्थानीय SHO और MCD अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि निर्धारित स्थल पर सभी निर्माण गतिविधियां तुरंत प्रभाव से रोक दी जाएं और किसी भी तरह की आगे की निर्माण प्रक्रिया न हो। इससे पहले अदालत निगम अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जता चुकी है, क्योंकि निर्माण रोकने के आदेश के बावजूद इमारत खड़ी कर दी गई थी। अब 6 अप्रैल की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां यह देखा जाएगा कि प्रशासन अदालत के आदेशों को कितनी सख्ती से लागू करता है।

MCD कमिश्नर को भी आदेश की एक कॉपी भेजी

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि उचित प्रशासनिक कार्रवाई के लिए आदेश की एक प्रति MCD कमिश्नर को भेजी जाए, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी बताया कि संपत्ति से जुड़े अन्य आवश्यक निर्देश भी जारी किए गए हैं, जिससे भविष्य में किसी तरह की अनियमितता न हो।

इस केस में अगली सुनवाई 4 मई को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अरुण कुमार, जबकि एमसीडी की ओर से विजय त्यागी पेश हुए। अदालत की कार्यवाही के दौरान एक और गंभीर पहलू सामने आया, जिसने न्यायिक प्रशासन की खामियों को उजागर किया। पता चला कि कोर्ट के नाजिर द्वारा संबंधित SDM और SHO को जरूरी नोटिस जारी नहीं किए गए, जबकि इसके लिए करीब दो महीने पहले ही निर्देश दिए गए थे।

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