पिछले 24 घंटों से जारी अनिश्चितता के बाद आखिरकार अमेरिका ने अपने उस पायलट का रेस्क्यू ऑपरेशन सफलता पूर्वक करने में कामयाबी हासिल कर ली है. अमेरिकी सेना ने अपने उस अफसर को खोज निकाला है, जो ईरान में मार गिराए गए F-15E ईगल के बाद लापता हो गया था. इस ऑपरेशन ने एक बार साबित कर दिया कि अमेरिकी मिलिट्री इस तरह के ऑपरेशन को कैसे सफलतापूर्वक अंजाम देती है. खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी फौज की खूब तारीफ की है. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि रेस्क्यू किया गया पायलट सेफ है और उसे सुरक्षित ईरान से निकाल लिया गया है.
यह बचाव अभियान किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था. अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस की रेस्क्यू टीमों को पायलट तक पहुंचने के लिए ईरान की धरती पर भारी गोलीबारी का सामना करना पड़ा. जिस पायलट को रेस्क्यू किया गया है, वह अमेरिकी एयरफोर्स में वेपन सिस्टम्स ऑफिसर है. दरअसल, शुक्रवार को कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी एयरक्राफ्ट को ईरान ने निशाना बनाया गया था, जो दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हालांकि, इसका पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में सफल रहा, जबकि दूसरा पायलट लापता हो गया था. इसके ईरान में गिरे होने की सूचना थी.
ईरान के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में लापता अमेरिकी पायलट को ना केवल अमेरिका सेना खोज रही था बल्कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर ‘सर्च ऑपरेशन’ शुरू कर दिया था. आईआरजीसी ने पायलट को खोजने के लिए सैनिकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों से भी अपील की थी और पायलट को जिंदा पकड़ने पर लगभग 60,000 डॉलर से अधिक का इनाम रखा गया था.
ईरानी संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने इसे लेकर बयान तक जारी कर दिया था. गलिबाफ ने इसे जंग का ‘टर्निंग पॉइंट’ करार देते हुए कहा कि अब युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है. उन्होंने कहा कि जो जंग कभी ‘सत्ता परिवर्तन’ के दावों से शुरू हुई थी, वह अब ज़मीन पर ‘अमेरिकी पायलटों के शिकार’ तक सिमट गई है.
पहाड़ी इलाके में छिपा था पायलट- रिपोर्ट
न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, विमान से बाहर निकलने के बाद ये पायलट लगभग 24 घंटे तक ईरान द्वारा पकड़े जाने से बचने में कामयाब रहा. उसने जीवित रहने के प्रशिक्षण का उपयोग करते हुए दुर्घटनास्थल से दूर जाकर पहाड़ी इलाके में खुद को छिपा लिया. खबरों के मुताबिक, पायलट ने बचाव दल को खुद की लोकेशन भेजने के लिए संकेतों का इस्तेमाल किया। इस दौरान ईरान के अधिकारी भी उसकी तलाश कर रहे थे.
अभियान में दर्जनों विमान, विशेष कमांडो इकाई थी शामिल
एक्सियोस ने अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि बचाव अभियान एक विशेष कमांडो इकाई द्वारा चलाया गया था, जिसकी मदद के लिए दर्जनों लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात किए गए थे. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि इस मिशन में कर्मियों को बचाने वाली टीमें दर्जनों विमानों के साथ मिलकर काम कर रही थीं, ताकि ईरानी क्षेत्र के अंदर काम कर रही बचाव इकाई की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
अमेरिकी सेना के संपर्क में थे पायलट
एक्सियोस ने बताया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बचाव प्रयास के समय और स्थान के बारे में ईरान को भ्रमित करने के लिए कई रणनीतियों का इस्तेमाल किया. इसका उद्देश्य ईरान को बचाव अभियान में बाधा डालने से रोकना था. अधिकारियों ने बताया कि दोनों चालक दल के सदस्य विमान से निकलने के बाद अमेरिकी सेना से संपर्क करने में सक्षम थे. इससे सेना को उनकी स्थिति का पता लगाने और बचाव अभियान का समन्वय करने में मदद मिली.
ट्रंप ने अभियान के बारे में क्या बताया?
ट्रंप ने कहा, ‘सैन्य इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि 2 अमेरिकी पायलटों को दुश्मन के इलाके से अलग-अलग अभियानों में बचाया गया है. हम कभी भी किसी अमेरिकी योद्धा को नहीं छोड़ेंगे! हम इन दोनों अभियानों को बिना किसी अमेरिकी सैनिक के मारे जाने या घायल हुए बिना सफलतापूर्वक पूरा कर पाए. यह एक बार फिर साबित करता है कि हमने ईरान के आसमान पर जबरदस्त हवाई वर्चस्व और श्रेष्ठता हासिल कर ली है.’
ट्रंप का अल्टीमेटम
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपना रुख और कड़ा करते हुए उसे 48 घंटे का अंतिम समय दिया है. ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ईरान के पास ‘समझौता करने या होर्मुज को खोलने’ के लिए अब केवल दो दिन का समय बचा है, अन्यथा उस पर ‘कहर’ बरपेगा. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए ईरान को उसके पुराने अल्टीमेटम की याद दिलाई. उन्होंने लिखा, ‘याद रखिए जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए 10 दिन का समय दिया था. अब समय तेजी से खत्म हो रहा है. उन पर कहर टूटने में बस 48 घंटे बाकी हैं.’
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