BJP 47th Foundation Day: भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा यानी बीजेपी का आज 47वां जन्मदिन है। 46 साल पहले आज के ही दिन 6 अप्रैल 1980 में दिल्ली के अंदर BJP की स्थापना हुई थी। अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee), लालकृष्ण अडवाणी (LK Advani), विजयाराजे सिंधिया (Vijaya Raje Scindia) जैसे दिग्गज नेताओं ने पार्टी की नींव रखी थी। कभी 2 सीटों पर सिमटकर रह जाने वाली BJP के पास आज लोकसभा में सबसे ज्यादा सांसद हैं और सदस्यों की संख्या के हिसाब से भी भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी है।
भारतीय जनता पार्टी अपने 46 सालों में कई बदलाव और संघर्ष के दौर से गुजरी। 1980 में मुंबई में हुए भाजपा के पहले अधिवेशन में अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था, “समुद्र तट से भरोसे के साथ भविष्य के बारे में कह सकता हूं,”अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा। वर्तमान में देश की राजनीति में 2014 से लगातार कमल खिला हुआ है। पार्टी मजबूती से केंद्र की सत्ता में बनी हुई है। उनका सपना पीएम मोदी के नेतृत्व में पूरा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के बनने से लेकर चुनाव चिन्ह के चयन तक पूरा वाकया बेहद रोमांचक है। आइए आपको बताते हैं बीजेपी की स्थापना से जुड़े रोचक किस्से।
बता दें कि वर्तमान बीजेपी की जड़ें अतीत में जनसंघ से जुड़ी हैं, जिसकी स्थापना साल 1951 में हुई थी। दरअसल इससे पहले भारतीय जनसंघ नाम की पार्टी थी, जिसे 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने स्थापित किया था। 1977 में जनसंघ अन्य पार्टियों के साथ मिलकर जनता पार्टी में शामिल हो गया।भाजपा ने 1980 का लोकसभा चुनाव जनता पार्टी ने बाबू जगजीवन राम के चेहरे को आगे करके लड़ा। पार्टी को सिर्फ 32 सीटों पर जीत मिली, जिसमें 19 जनसंघ की थीं।
जगजीवनराम ने हार की जिम्मेदारी खुद पर लेने की जगह इसे जनसंघ के मत्थे मढ़ा। जोर दिया कि जनसंघ के लोगों को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ या जनता पार्टी में एक को चुनना होगा। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी और पार्टी अध्यक्ष चंद्रशेखर की सुलह की कोशिशें नाकाम रहीं। दोहरी सदस्यता के सवाल पर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की 4 अप्रैल 1980 की निर्णायक बैठक में 140 के मुकाबले 17 वोटों से वह प्रस्ताव पारित हो गया, जिसमें दोहरी सदस्यता को अमान्य किया गया था। इस तरह कुछ वैचारिक मतभेदों के कारण 1980 में अलग होकर बीजेपी का गठन किया गया।
इन लोगों ने की बीजेपी की स्थापना

अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी न सिर्फ BJP के संस्थापक सदस्य हैं, बल्कि पार्टी के पहले अध्यक्ष रहने का खिताब भी उनके नाम पर ही है। बीजेपी के गठन के समय अध्यक्षीय भाषण में अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि हम भविष्य की तरफ देखते हुए नई पार्टी का निर्माण कर रह हैं। अटल बिहारी वाजपेयी पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा किया।

लाल कृष्ण आडवाणी
लाल कृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी की जोड़ी सियासी गलियारों में काफी चर्चित थी। दोनों की जुगलबंदी के किस्से पूरे देश में मशहूर थे। अपनी किताब माय कंट्री माय लाइफ (My Country My Life) में लाल कृष्ण आडवाणी बताते हैं कि किस तरह से बीजेपी के चुनाव चिन्ह को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। सबसे पहले संस्थापक सदस्यों में बहस नाम को लेकर थी। कुछ सदस्यों का मत था कि पार्टी का नाम भारतीय जनसंघ रखा जाना चाहिए। तब अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय जनता पार्टी सुझाया। इस नाम को भारी बहुमत से पास किया गया।

विजयाराजे सिंधिया
कांग्रेस के दबदबे में जनसंघ को एक-एक सीट पर जीत के लिए मशक्कत करनी पड़ती थी। उस दौर में कांग्रेस से जनसंघ में आईं राजमाता विजयराजे सिंधिया ने अपनी जादुई छवि से पार्टी को जीत दिलाई। गुना, ग्वालियर और भिंड जैसे इलाकों में जनसंघ की एंट्री हुई। जनता पार्टी में विलय और फिर बिखराव के बाद जब भारतीय जनता पार्टी बनी, तब भी राजमाता ने पार्टी को कई बार मुश्किलों से बाहर निकाला। गुना लोकसभा सीट से राजमाता विजया राजे सिंधिया 6 बार सांसद रहीं। कांग्रेस में 10 साल गुजारने के बाद राजमाता विजया राजे सिंधिया 1967 में जनसंघ की मेंबर बनी। 1971 में आम चुनाव हुए। इंदिरा गांधी और कांग्रेस के मुकाबले सारी पार्टियां कमजोर नजर आ रही थी। तब विजियाराजे ने सिंधिया परिवार के गढ़ भिंड, गुना और ग्वालियर से जनसंघ को जीत दिलाई थी।

भाजपा की स्थापना की नींव में मुस्लिम शख्स भी शामिल
क्या आप जानते हैं कि बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में सिकंदर बख्त भी शामिल थे, जो मुस्लिम थे। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी का खास दोस्त माना जाता था। सबसे पहले उन्होंने 1952 में कांग्रेस के टिकट पर एमसीडी का चुनाव जीता। उन्हें 1968 में दिल्ली इलेक्ट्रिक सप्लाई अंडरटेकिंग का चेयरमैन चुना गया। उन्होंने इंदिरा गांधी के खिलाफ कांग्रेस-ओ का दामन थामा था। जनता पार्टी के टिकट पर उन्होंने दिल्ली के चांदनी चौक 1977 में सांसदी का चुनाव जीता। सिकंदर बख्त बीजेपी के महासचिव बने और 1984 में पार्टी के उपाध्यक्ष पद तक पहुंचे।

बीजेपी ने कमल का फूल ही क्यों चुना
वहीं बीजेपी का चुनाव का चिन्ह कमल का फूल ही क्यों चना गया इसकी बात करें करें तो लाल कृष्ण आडवाणी ने अपनी किताब माय कंट्री माय लाइफ किताब में बताया है कि बीजेपी ने बेहद कम समय में अपनी एक अलग पहचान बना ली थी। ऐसे में पार्टी को अपने उम्मीदवारों को चुनाव में उतारने के लिए चुनाव चिन्ह का चयन करना था। ऐसे में पार्टी के संस्थापक सदस्य मुख्य चुनाव आयुक्त एसएल शकधर से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने सुझाव दिया था कि वह ऐसे किसी चिन्ह को चुन सकते हैं जो स्वतंत्र उम्मीदवारों को अलॉट किया गया है। वह चिन्ह उनकी पार्टी के सभी उम्मीदवारों को दिया जा सकता है। इसमें कमल का फूल भी था। जिसे पार्टी ने चुनाव चिन्ह के रूप में चुना।

पवित्रता, शुद्धता और उन्नति का प्रतीक
बता दें कि कमल भारतीय संस्कृति में पवित्रता, शुद्धता और उन्नति का प्रतीक माना जाता है। यह फूल कीचड़ में उगता है, लेकिन फिर भी साफ और सुंदर रहता है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनाव चिन्ह के रूप में कमल को अपनाकर यह संदेश दिया कि वह भारतीय मूल्यों, संस्कृति और विकास के रास्ते पर चलने वाली पार्टी है।
दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी
अगस्त 2019 के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है, जिसके सदस्यों की संख्या लगभग 18 करोड़ (180 मिलियन) से अधिक है। यह 2014 के 11 करोड़ सदस्यों के लक्ष्य को पार कर चुकी है। ताजा अनुमान के मुताबिक भाजपा के सदस्यों की संख्या 22 करोड़ के पार हो गई है। इसल तरह यह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है।
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