US-Iran War: अमेरिका और ईरान युद्ध के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) बंद होने के कारण तेल और गैस सप्लाई ठप होने के कारण विश्व में हड़कंप मचा हुआ है। इसका अवसर उद्योग-धंधों पर भी पड़ रहा है। वहीं अमेरिका और तेहरान के बीच युद्धविराम पर अब भी कोई फैसला नहीं हो पाया है। होर्मुज स्ट्रेट की ईरानी नाकेबंदी से उभरे संकट का दुनिया अभी तक हल ढूंढते में जुटी है। इसी भी ईरान ने एक और बड़े समुद्री मार्ग पर पर अपना ध्यान केंद्रित करने के संकेत दिए हैं। ये है ‘बाब अल-मंदेब स्ट्रेट’ (Bab al-Mandab Strait)। अमेरिकी-इजराइली हमले बढ़ने पर ईरान ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को ठप करने की धमकी दी है। अगर ऐसा होता है तो तरराष्ट्रीय सप्लाई चेन और ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह ठप हो जाएगी और पूरे विश्व में त्राहिमाम मच जाएगा।
अब बाब अल मंदेब को लेकर ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने भी धमकी दी है। उन्होंने धमकी दी है कि वह ‘एक लीटर भी तेल’ नहीं ले जाने देंगे। हाल ही में इजरायल पर मिसाइल हमले करके हूतियों ने पश्चिम एशिया युद्ध में पहली बार एंट्री की है। ऐसे में अगर होर्मुज के मौजूदा संकट के बाद बाब अल मंदेब भी बाधित हुआ तो इसका भारत समेत पूरी दुनिया के तेल समेत हर तरह के कारोबार पर असर पड़ सकता है।
यूं तो बाब अल-मंदेब स्ट्रेट ईरान से करीब 2 हजार किलोमीटर दूर यमन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। लेकिन यहां ईरान समर्थित हूती गुट का ठिकाना है. ऐसे में ईरान के कहने पर हूती गुट इस युद्ध में एक नया मोर्चा खोलने को तैयारी है। ईरान के एक सैन्य सूत्र ने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी क्षेत्र या उसके द्वीपों पर हमला होता है, तो वह बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में नया मोर्चा खोल सकता है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के खिलाफ हूती विद्रोहियों की एंट्री हो गई है।

भारत के लिए इसलिए अहम है बाब अल मंदेब
लाल सागर रूट भारत के यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से कारोबार के लिए बेहद अहम रहा है। क्रिसिल रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, 2022-23 के दौरान बाब अल मंदेब से भारत का करीब 50 फीसदी निर्यात होता है और 30 फीसदी आयात होता है। भारत का यूरोप से करीब 80 फीसदी कारोबार बाब अल मंदेब से होकर गुजरता है। भारत का कुल वस्तु निर्यात का 15 फीसदी से ज्यादा यूरोपीय यूनियन को इसी रास्ते से किया जाता है। यह सालाना करीब 450 बिलियन डॉलर है।
दुनिया के 30 फीसदी तेल सप्लाई पर ग्रहण
होर्मुज तो पहले ही बंद है। सूत्रों के अनुसार, हमले तेज होने की स्थिति में ईरान बाब अल मंदेब भी बंद करवा सकता है। ऐसे में दोनों स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया के करीब 30 फीसदी तेल की आपूर्ति के ठप होने का खतरा बढ़ सकता है। EIA के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के मध्य में बाब अल मंदेब से 42 लाख बैरल प्रति दिन कच्चा तेल और पेट्रोलियम प्रोडॅक्ट्स गुजरा था। यह पूरी दुनिया का करीब 5.3 फीसदी समुद्री तेल कारोबार है। यह दुनिया के करीब 5 फीसदी तेल खपत का हिस्सा है।
- यह लाल सागर के लिए एंट्री गेट है, जहां से सीधे स्वेज नहर पहुंचा जा सकता है।
- बाब अल मंदेब 100 किलोमीटर लंबा और 29 किलोमीटर चौड़ा है। यहां से जहाज नियंत्रित रूप में हमलों से बचते हुए गुजरते हैं।
- करीब 10-12 फीसदी वैश्चिक समुद्री व्यापार और 9 फीसदी कच्चा तेल हर दिन यहां से गुजरता है। यह दक्षिणी स्वेज नहर का गेट भी है।

इसके बंद होने से दुनिया में आ सकती है मंदी
अगर यह जलमार्ग पूरी तरह बाधित होता है, तो इसके बेहद बड़े आर्थिक असर हो सकते हैं। आशंका है कि इससे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे दुनियाभर में महंगाई आसमान छूने लग सकती है। उद्योगों की लागत बढ़ेगी, सप्लाई चेन प्रभावित होगी और कई देशों की अर्थव्यवस्था मंदी तक का शिकार हो सकती है।
बाब अल मंदेब बन सकता है आंसुओं का द्वार
बाब अल-मंदब एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘आंसुओं का दरवाजा’… यह स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। लगभग 100 किलोमीटर लंबा और 30 किलोमीटर चौड़ा यह मार्ग यमन को हॉर्न ऑफ अफ्रीका कहे जाने वाले जिबूती और इरिट्रिया से अलग करता है। एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों को स्वेज नहर पहुंचने के लिए इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस शिपमेंट्स का 10 से 12 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। साथ ही वैश्विक व्यापार का करीब 12 प्रतिशत और स्वेज नहर से गुजरने वाले कंटेनर ट्रैफिक का 40 प्रतिशत इसी मार्ग पर निर्भर है।
पहले भी बाब अल मंदेब बाधित हो चुका है
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाब अल मंदेब पहले भी बाधित हो चुका है। 1973 में अरब-इजराययल युद्ध, 2000 के दशक में सोमालियाई समुद्री डकैतों की धमकी की वजह से, 2015 से यमन युद्ध के चलते, 2023 में इजरायल के गाजा पर किए गए हमलों के चलते हूतियों ने बाब अल मंदेब से कोई भी जहाज गुजरने पर हमले करने शुरू कर दिए। इसके बाद से बाब अल मंदेब कई बार प्रभावित रहा है।
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