Rajasthan News: पूर्वी राजस्थान के जल संकट को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को बूंदी के गोहाटा गांव पहुंचकर महत्वाकांक्षी चंबल एक्वाडक्ट परियोजना का निरीक्षण किया और विधि-विधान से भूमि पूजन कर इसका शुभारंभ किया। सीएम ने साफ कहा कि इस प्रोजेक्ट को तय समय पर पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है।

क्या है यह योजना?
दरअसल, यह ईआरसीपी (ERCP) का सबसे अहम हिस्सा है। कोटा और बूंदी के बीच चंबल नदी पर करीब 2.3 किलोमीटर लंबा एक बड़ा ढांचा (एक्वाडक्ट) बनाया जा रहा है। यह देश का सबसे लंबा एक्वाडक्ट बताया जा रहा है, जिस पर लगभग 2,330 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका मकसद बरसात के बेकार बहने वाले पानी को सहेजकर उन इलाकों तक पहुंचाना है जहां पानी की भारी कमी है।
3 करोड़ से ज्यादा लोगों को फायदा
बता दें कि इस मेगा प्रोजेक्ट से बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़, सवाई माधोपुर, टोंक, अजमेर और जयपुर सहित कुल 17 जिलों की किस्मत बदलेगी। इससे करीब 3.25 करोड़ लोगों को पीने का साफ पानी मिलेगा। 4 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन की सिंचाई हो सकेगी। करीब 40 गांवों को फ्लोराइड की समस्या से हमेशा के लिए आजादी मिलेगी।
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि काम की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। गौरतलब है कि इस पूरे प्रोजेक्ट (पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक) की कुल लागत करीब 90 हजार करोड़ रुपये है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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