सोहराब आलम/ मोतिहारी। बिहार में जहरीली शराब से हुई मौतों पर सियासत का पारा गरमाया हुआ है, लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर भी विपक्षी नेताओं की आधी-अधूरी तैयारी ने सरकार को घेरे में लेने के बजाय खुद विपक्ष पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात तो की, लेकिन उनके द्वारा पेश किए गए आंकड़े और तथ्य जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आए।
गलत तथ्यों पर टिकी संवेदना?
अखिलेश सिंह जब जहरीली शराब कांड के पीड़ितों का दर्द बांटने पहुंचे, तो ऐसा लगा कि उनके सलाहकारों ने उन्हें पूरी तरह गुमराह कर दिया है। सांसद महोदय ने मीडिया के सामने घटना की जो जानकारी रखी, उसमें तारीख से लेकर मृतकों की संख्या तक सब कुछ संदेहास्पद था। जहां यह घटना 1 अप्रैल की बताई जा रही है, वहीं अखिलेश सिंह इसे 14 अप्रैल की घटना बताते रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने मृतकों का आंकड़ा भी बढ़ा-चढ़ाकर 50 से 56 के बीच बता दिया, जो आधिकारिक और प्राथमिक सूचनाओं से काफी भिन्न है।
मुआवजे पर सरकार को घेरा
तथ्यों की चूक के बावजूद अखिलेश सिंह ने नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे कांड में ‘लीपा-पोती’ कर रही है। उनका दावा था कि पीड़ित गरीब परिवारों को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है, जबकि सरकार केवल आंकड़ों को दबाने में जुटी है। उन्होंने इसे प्रशासन की विफलता करार देते हुए सरकार की नियत पर सवाल उठाए।
न्यायिक जांच की मांग
कांग्रेस नेता ने मांग की कि इस पूरे शराब कांड की जांच सामान्य पुलिसिया कार्रवाई के बजाय न्यायिक स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई जाए। उनके अनुसार, स्थानीय प्रशासन मामले को रफा-दफा कर सकता है, इसलिए उच्च स्तरीय जांच ही एकमात्र रास्ता है। हालांकि, तथ्यों की इस बड़ी गड़बड़ी ने विपक्ष की गंभीरता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
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