Bastar News Update : बस्तर. बस्तर पुलिस ने नशे के खिलाफ निर्णायक मोड में आते हुए कोतवाली थाना क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई कर ड्रग सप्लाई चेन पर सीधा प्रहार किया है. पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा के निर्देश पर सन सिटी अटल आवास रोड के पास घेराबंदी कर दो युवकों को उस वक्त दबोचा गया जब वे ग्राहकों का इंतजार कर रहे थे, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुम्हारपारा निवासी आशीष जॉर्ज और डीगेश्वर उर्फ शूटर के रूप में हुई है, तलाशी में इनके पास से 870 नग प्रतिबंधित अल्प्राजोलम टेबलेट्स बरामद हुईं जिनकी कीमत करीब 4.35 लाख रुपए आंकी गई है, साथ ही तस्करी में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है, पुलिस रिकॉर्ड में आशीष जॉर्ज पहले से ही आदतन ड्रग पैडलर के रूप में चिन्हित रहा है, थाना प्रभारी लीलाधर राठौर के नेतृत्व में टीम ने मुखबिर सूचना पर त्वरित एक्शन लेते हुए आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा, आरोपियों द्वारा वैध दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया और जेल भेज दिया गया, इस कार्रवाई को जिले में सक्रिय ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, पुलिस ने साफ किया है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी नेटवर्क को बख्शा नहीं जाएगा, लगातार अभियान चलाकर ऐसे तत्वों पर नकेल कसने की रणनीति अपनाई जा रही है, बस्तर पुलिस का यह रुख आने वाले दिनों में और सख्त होने के संकेत दे रहा है.

पूर्व नक्सली बारसे देवा का छोटा भाई बना टीचर

सुकमा. सुकमा के पूवर्ती क्षेत्र के ओयापारा गांव में अब गोलियों की गूंज नहीं बल्कि बच्चों की पढ़ाई की आवाज सुनाई दे रही है और इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बना है बारसे परिवार. कभी माओवादी प्रभाव में रहा यह परिवार अब मुख्यधारा की ओर लौटकर नई दिशा तय कर रहा है. माओवादी बटालियन कमांडर रहे बारसे देवा का छोटा भाई बारसे बुधरा आज गांव के बच्चों को पढ़ाकर शिक्षा की रोशनी फैला रहा है. संघर्ष और भय के माहौल में पले-बढ़े बुधरा ने दोहरी चुनौतियों के बीच अपनी पढ़ाई पूरी की जहां एक ओर पुलिस की पूछताछ का दबाव था तो दूसरी ओर नक्सलियों का शक. कई बार पढ़ाई छोड़कर थाने तक जाना पड़ा लेकिन उसने हार नहीं मानी. पुनर्वास नीति के तहत उसे सिलगेर प्राथमिक शाला में शिक्षादूत के रूप में नियुक्त किया गया और अब उसे मासिक मानदेय भी मिल रहा है. यह पहल खास इसलिए भी है क्योंकि उसे रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया उसके भाई के सरेंडर से पहले ही शुरू कर दी गई थी. कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार सरकार अब सिर्फ सरेंडर तक सीमित नहीं बल्कि पूरे परिवार को मुख्यधारा में जोड़ने पर फोकस कर रही है. गांव में सड़क, स्कूल, आंगनबाड़ी और परिवहन सुविधाएं पहुंचने से लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है. जहां पहले जगरगुंडा तक पहुंचना चुनौती था वहीं अब बस सेवाएं उपलब्ध हैं. बुधरा की कहानी यह संदेश दे रही है कि सही नीति और अवसर मिलने पर बस्तर का युवा बंदूक नहीं बल्कि किताब को चुन रहा है.

माफिया बनाम प्रशासन, पोकलेन जब्ती ने तोड़ा अवैध खनन का हौसला

बस्तर. बस्तर जिले में अवैध खनिज उत्खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त तेवर दिखाते हुए बकावंड तहसील के बेलगांव-बनियागांव में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. लगातार मिल रही शिकायतों के बाद खनिज विभाग ने एक भारी-भरकम पोकलेन मशीन जब्त की जिसे सुरक्षित अभिरक्षा में लाना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया. 26 मार्च को पहली बार मशीन सील की गई थी लेकिन माफियाओं ने दोबारा उसी मशीन से खनन की कोशिश की. 1 अप्रैल को जब टीम मशीन जब्त करने पहुंची तो ग्रामीणों के विरोध के चलते लौटना पड़ा जिससे माफिया की पैठ का अंदाजा लगा, लेकिन 9 अप्रैल को एसडीएम विपिन दुबे के नेतृत्व में राजस्व, खनिज और पुलिस की संयुक्त टीम ने दोबारा मोर्चा संभाला और शिफ्टर के जरिए मशीन को सिटी कोतवाली जगदलपुर पहुंचा दिया. इस कार्रवाई ने साफ कर दिया कि प्रशासन अब किसी दबाव में नहीं आने वाला. कलेक्टर आकाश छिकारा ने जिलेभर में अवैध उत्खनन पर निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं. इस पूरे प्रकरण में भारी जुर्माने की तैयारी भी की जा रही है. प्रशासन का यह कदम अवैध रेत कारोबार पर बड़ी चोट माना जा रहा है. पुलिस अभिरक्षा में रखी गई मशीन के दोबारा इस्तेमाल की संभावना खत्म कर दी गई है. आने वाले समय में ऐसे और सख्त एक्शन की संभावना जताई जा रही है.

इनोवेशन की उड़ान, महाकुंभ से निखरेगी युवाओं की रचनात्मक ताकत

बस्तर. शहीद महेंद्र कर्मा बस्तर विश्वविद्यालय में प्रस्तावित इनोवेशन महाकुंभ 1.0 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. 4 और 5 मई को होने वाले इस आयोजन से पहले कुलपति प्रोफेसर मनोज कुमार श्रीवास्तव ने स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने आर्ट एंड क्राफ्ट से जुड़े नवाचार मॉडल्स को देखा और विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना की. उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि इन मॉडलों को और उपयोगी व व्यावहारिक बनाया जाए ताकि इनोवेशन का वास्तविक लाभ समाज तक पहुंचे. आयोजन के तहत राष्ट्रीय सेवा योजना के करीब 30 स्वयंसेवकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें आर्ट और क्राफ्ट की विभिन्न विधाएं सिखाई जा रही हैं. प्रशिक्षण का मार्गदर्शन राष्ट्रपति सम्मानित विशेषज्ञ डॉ शैलेन्द्र ठाकुर द्वारा किया जा रहा है. कार्यक्रम संयोजक और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. इस महाकुंभ का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, कौशल और सृजनात्मक सोच को बढ़ावा देना है. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस तरह के आयोजन युवा प्रतिभाओं को मंच देने के साथ उन्हें भविष्य के लिए तैयार करते हैं. बस्तर जैसे क्षेत्र में यह पहल नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली साबित हो सकती है.

वादे बनाम हकीकत, नक्सलमुक्ति पर सियासत ने पकड़ा जोर

बस्तर. बस्तर में नक्सलमुक्ति के दावों के बीच अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि यदि बस्तर और प्रदेश को नक्सलमुक्त घोषित किया जा रहा है तो सरकार को अपनी घोषणा के अनुसार प्रत्येक नक्सलमुक्त ग्राम पंचायत को 1 करोड़ रुपए तत्काल देना चाहिए. उन्होंने मांग की कि बस्तर सहित राजनांदगांव, मोहला-मानपुर, बलरामपुर, कवर्धा, गरियाबंद और धमतरी के सभी प्रभावित क्षेत्रों को इसका लाभ मिले. बैज ने महिला एवं बाल विकास विभाग पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए इसे भ्रष्टाचार का अड्डा बताया और आंगनबाड़ी में घटिया सामग्री वितरण व पोषण आहार खरीदी में अनियमितता का मुद्दा उठाया. उन्होंने शुचिता योजना और सामूहिक विवाह योजना में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया. साथ ही बस्तर के विकास के लिए 50 हजार करोड़ के विशेष पैकेज की मांग करते हुए युवाओं के लिए रोजगार और भर्ती अभियान चलाने की बात कही. एनएमडीसी के मुख्यालय को बस्तर में स्थापित करने की भी मांग उठाई गई. बयान में यह आशंका भी जताई गई कि खनिज संपदा निजी हाथों में सौंपी जा सकती है. इस पूरे मुद्दे ने बस्तर में विकास और नीतियों को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है.

अंतिम संस्कार स्थलों का कायाकल्प, सम्मानजनक विदाई की दिशा में कदम

बस्तर. नगर निगम क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम फैसला लिया गया है. मुक्तिधाम योजना के तहत शहर के दो प्रमुख वार्डों में स्थित मुक्तिधामों के उन्नयन के लिए 57.77 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई है. लोकमान्य तिलक वार्ड क्रमांक 37 के लिए 27.79 लाख और लालबहादुर शास्त्री वार्ड आमागुड़ा क्षेत्र के लिए 29.98 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं. इस राशि से बाउंड्रीवाल निर्माण, वेटिंग शेड, पेयजल सुविधा और सघन पौधारोपण जैसे कार्य किए जाएंगे. इन विकास कार्यों का उद्देश्य अंतिम संस्कार के दौरान आने वाले लोगों को बेहतर और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है. महापौर संजय पांडेय ने इस स्वीकृति पर प्रदेश के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों का आभार जताया है. परियोजना के पूरा होने से नागरिकों को धूप, बारिश और असुविधाओं से राहत मिलेगी, साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा. नगर निगम का मानना है कि यह पहल शहर के संवेदनशील बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.

जंगल में माफिया पर वार, वन विभाग की दोहरी कार्रवाई से हड़कंप

सुकमा. सुकमा जिले में आरक्षित वन क्षेत्रों में हो रहे अवैध उत्खनन पर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए माफियाओं पर शिकंजा कस दिया है. गोलापल्ली और किस्टाराम रेंज में संयुक्त अभियान चलाकर 4 टिप्पर ट्रक और 2 जेसीबी मशीन जब्त की गई हैं. पहली कार्रवाई गोलापल्ली में हुई जहां बिना अनुमति मुरम उत्खनन कर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया जा रहा था. मौके से दो टिप्पर और एक जेसीबी जब्त कर सन्नु वाचम, लक्ष्मैया और सुधाकर की संलिप्तता पाई गई, वहीं दूसरी कार्रवाई किस्टाराम में की गई जहां दो और टिप्पर तथा एक जेसीबी पकड़ी गई और सुमन राय, बंशीधर कश्यप व सुनील बघेल के नाम सामने आए, यह पूरा अभियान उपवनमंडलाधिकारी कोन्टा राहुल देवांगन के नेतृत्व में चलाया गया जिसमें रेंजर्स और वन अमले की संयुक्त टीम ने साक्ष्य जुटाए. डीएफओ अक्षय भोसले ने बताया कि जब्त वाहनों को राजसात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. साथ ही अन्य संलिप्त लोगों की पहचान कर आगे कार्रवाई की जाएगी. वन मंत्री के निर्देश पर चल रहा यह अभियान जंगलों को बचाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा.

घर-घर हेल्थ मिशन, स्वस्थ बस्तर से 27 लाख आबादी की स्क्रीनिंग

बस्तर. बस्तर संभाग को बीमारियों से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ ‘स्वस्थ बस्तर अभियान’ की शुरुआत हो चुकी है. 7 अप्रैल से 6 मई तक चलने वाले इस महाअभियान के तहत संभाग के सातों जिलों की करीब 27.81 लाख आबादी की घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच की जाएगी. अभियान का उद्देश्य हर नागरिक का डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार कर उसे आयुष्मान भारत योजना से जोड़ना है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने विस्तृत माइक्रो प्लान तैयार किया है, जिसमें बस्तर जिले का लक्ष्य 7.64 लाख, कांकेर 7.10 लाख, कोंडागांव 5.47 लाख, दंतेवाड़ा 2.83 लाख, बीजापुर 2.01 लाख, सुकमा 1.55 लाख और नारायणपुर 1.18 लाख निर्धारित किया गया है. टीमों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, मितानिन और डाटा ऑपरेटर शामिल होंगे, जो घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करेंगे. दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में टीबी, मलेरिया, कुष्ठ, फाइलेरिया के साथ मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की पहचान की जाएगी. गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर विशेष फोकस रहेगा, मौके पर दवाइयों का वितरण और जरूरत पड़ने पर उच्च केंद्रों में रेफरल की व्यवस्था भी की गई है. मोबाइल ऐप के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी. यह अभियान बस्तर के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.