Bastar News Update : जगदलपुर। बस्तर संभाग के स्वास्थ्य क्षेत्र में 13 अप्रैल 2026 नई उम्मीद लेकर आया, जब महारानी जिला अस्पताल में अत्याधुनिक अटल आरोग्य लैब जनता को समर्पित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसका लोकार्पण किया, जबकि स्थानीय स्तर पर फीता काटकर सेवाएं शुरू कराई गईं। अब मरीजों को जटिल जांचों के लिए निजी लैब या बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। यहां 134 प्रकार की पैथोलॉजी जांचें उपलब्ध रहेंगी। लैब हब एंड स्पोक मॉडल पर संचालित होगी, जिससे ग्रामीण इलाकों से भी सैंपल यहां पहुंच सकेंगे। रिपोर्ट डिजिटल माध्यम से सीधे अस्पतालों और मरीजों तक पहुंचेगी। कलेक्टर आकाश छिकारा ने निरीक्षण कर गुणवत्ता और समयबद्धता पर जोर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सटीक जांच और सही इलाज ही प्राथमिक लक्ष्य है। हेल्थ आईडी प्रणाली से मरीजों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इससे डॉक्टरों को पुरानी केस हिस्ट्री समझने में आसानी होगी। पूरी सुविधा निशुल्क होगी, जिससे आर्थिक बोझ कम होगा। यह पहल बस्तर के स्वास्थ्य तंत्र को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

उड़ान 2.0 से उम्मीद, लेकिन बस्तर अब भी इंतजार में
जगदलपुर. केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने के लिए उड़ान 2.0 योजना को मंजूरी दे दी है, लेकिन बस्तरवासियों की नजर अब मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर टिक गई है। योजना के तहत देशभर में 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपैड विकसित किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ में भी 3 से 4 नए हवाई अड्डों की चर्चा है। इसके बावजूद जगदलपुर एयरपोर्ट से नियमित उड़ानों का संकट बना हुआ है। जबलपुर और बिलासपुर की सेवाएं बंद हो चुकी हैं, रायपुर उड़ान भी अस्थिर बनी रहती है। लंबे समय से विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर और बेंगलुरु कनेक्टिविटी की मांग उठ रही है। व्यापार, पर्यटन और आपातकालीन यात्रा प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि योजनाएं कागजों में तेज हैं, जमीन पर नहीं। बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्र को स्थायी एयर नेटवर्क की जरूरत है। एयर कनेक्टिविटी मजबूत होने से उद्योग और पर्यटन को बड़ा लाभ मिलेगा। अब देखना है कि नई योजना में बस्तर को कितनी प्राथमिकता मिलती है। जनता ठोस फैसले का इंतजार कर रही है।
नक्सल छाया से विकास मंच तक पहुंचा जिला
सुकमा। सुकमा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 308 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन कर बड़ा संदेश दिया है। मिनी स्टेडियम में उमड़ी भीड़ को मुख्यमंत्री ने शांति और बदलते माहौल का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि सुकमा अब भय नहीं, विकास की पहचान बनेगा। वर्षों तक प्रभावित रहे क्षेत्र में अब सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य पर तेजी से काम होगा। जगरगुंडा और ओरछा को एजुकेशन सिटी बनाने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने स्वस्थ बस्तर अभियान का भी शुभारंभ किया, जिसके तहत सात जिलों के 32 ब्लॉकों में घर-घर स्वास्थ्य स्क्रीनिंग होगी। गंभीर मरीजों का इलाज बड़े अस्पतालों में सरकारी खर्च पर कराया जाएगा। दंतेवाड़ा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का काम भी शुरू बताया गया। नियद नेल्लानार योजना से दूरस्थ गांवों में सड़क, बिजली और राशन पहुंचने का दावा किया गया। साथ ही सिंचाई परियोजनाओं और पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही गई। सुकमा के लिए आठ नई घोषणाएं भी की गईं। जिला अब संघर्ष नहीं, संभावनाओं की नई तस्वीर पेश कर रहा है।
नशे के नेटवर्क पर पुलिस की बड़ी चोट
जगदलपुर। बस्तर पुलिस ने अवैध मादक पदार्थ कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के गोयल धर्मशाला से 54 किलो गांजा बरामद किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 26 लाख 97 हजार रुपए आंकी गई है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि यहां सौदे की तैयारी चल रही है। दबिश के दौरान राजस्थान के चार खरीदार और सुकमा के दो सप्लायर पकड़े गए। आरोपियों के कब्जे से चार बैग में पैक गांजा, छह मोबाइल और नकदी जब्त की गई। तस्करों ने पुलिस से बचने धर्मशाला को डील प्वाइंट बनाया था। थाना बोधघाट पुलिस ने घेराबंदी कर सभी को रंगे हाथ दबोच लिया। मामले को सक्रिय ड्रग सिंडिकेट पर बड़ी चोट माना जा रहा है। अब पुलिस बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज खंगाल रही है। आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। सभी को जेल भेज दिया गया है। लगातार कार्रवाई से तस्करों में हड़कंप है।
धर्म स्वातंत्र्य कानून के खिलाफ मसीही समाज का प्रदर्शन
जगदलपुर। जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में इसाई एकता मंच बस्तर संभाग ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के विरोध में एकदिवसीय धरना और रैली आयोजित की। हजारों की संख्या में मसीही समाज के लोग शहर के मुख्य मार्गों से रैली निकालते हुए पहुंचे। राज्यपाल, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नया अधिनियम धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार पर प्रभाव डालता है। वक्ताओं ने दावा किया कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 से 28 तक के प्रावधानों से टकराता है। समाज के प्रतिनिधियों ने कानून पर पुनर्विचार की मांग रखी। उनका कहना है कि प्रचार और आस्था परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में देखना उचित नहीं है। सभा में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन स्वीकार किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा भी शामिल रहे। पूरे आयोजन में अनुशासन बना रहा। अब आगे की रणनीति पर समाज विचार करेगा।
रावघाट खदान में आंदोलन की चेतावनी
नारायणपुर। रावघाट खदान क्षेत्र में स्थानीय समस्याओं को लेकर श्रमिकों और ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। राजाराव बूढ़ादेव गोद ग्राम श्रमिक विकास समिति ने 20 अप्रैल से अनिश्चितकालीन धरना और काम बंद आंदोलन की चेतावनी दी है। समिति का कहना है कि प्रबंधन को 31 मार्च तक मांगें पूरी करने का समय दिया गया था, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का वादा अब तक अधूरा है। लेबर भर्ती प्रक्रिया शुरू तक नहीं हो सकी। तीन साल से खदान संचालन जारी है, फिर भी प्रभावित गांवों में स्कूल और अस्पताल नहीं बन सके। ग्रामीण इलाज और बच्चों की पढ़ाई को लेकर परेशान हैं। परिवहन दर तय न होने से स्थानीय ट्रांसपोर्टर भी आर्थिक संकट में हैं। समिति ने कहा कि अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए। प्रशासन और प्रबंधन को पहले ही पत्र भेजा जा चुका है। हालात नहीं सुधरे तो खदान का काम पूरी तरह ठप हो सकता है। क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
बिजली कटौती से किसानों का फूटा गुस्सा
कोंडागांव। लगातार बिजली कटौती से परेशान ग्रामीण किसानों ने दहीकोंगा वितरण केंद्र कार्यालय पहुंचकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। किसानों का आरोप है कि पहले से तय चार घंटे की कटौती के अलावा भी कभी भी बिजली बंद कर दी जाती है। इससे रबी फसलों की सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। गर्मी के मौसम में घरों के पंखे, कूलर और अन्य उपकरण भी बंद पड़े हैं। ग्रामीणों ने कहा कि बिना सूचना अतिरिक्त कटौती से दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है। इससे पहले बड़ेबेंदरी गांव के ग्रामीण भी विद्युत कार्यालय का घेराव कर चुके हैं। किसानों ने ज्ञापन सौंपकर नियमित आपूर्ति की मांग की। उनका कहना है कि खेती और घरेलू जरूरत दोनों संकट में हैं। गर्मी बढ़ने से समस्या और गंभीर हो रही है। विभागीय अधिकारियों से जल्द समाधान की अपेक्षा जताई गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण इस दौरान मौजूद रहे। यदि सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन तेज हो सकता है।
गर्मी बढ़ी, गांवों में पानी का संकट गहराया
बस्तर। बस्तर जिले के ग्रामीण इलाकों में इस साल जल संकट की आशंका गहराने लगी है। कई कुएं, तालाब और बरसाती नाले सूखने लगे हैं, जबकि कुछ पोखरों में पानी लगभग खत्म हो चुका है। जिन गांवों में नल-जल योजना पहुंची है, वहां कुछ राहत है, लेकिन कई बस्तियां अब भी संकट झेल रही हैं। लोगों को निस्तारी के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। बदरेंगा गांव की महिलाओं ने बताया कि पहले ऐसी स्थिति कम थी, लेकिन अब हर साल परेशानी बढ़ रही है। हैंडपंपों से भी कम पानी निकल रहा है। इंद्रावती नदी किनारे बसे गांवों को कुछ राहत है, मगर तालाब आधारित गांवों में हालात कठिन हैं। विशेषज्ञ जल संरक्षण पर जोर दे रहे हैं। गांवों में तालाब पाटे जाने और भूजल गिरने को भी कारण माना जा रहा है। बरसात का पानी संरक्षित नहीं होने से संकट गहरा रहा है। मई-जून में हालात और बिगड़ सकते हैं। समय रहते ठोस योजना की जरूरत महसूस की जा रही है।
तेज रफ्तार और टाइमिंग दबाव बना हादसों की वजह
केशकाल। नेशनल हाईवे-30 पर मुरवेंड के पास यात्री बस और ट्रक की जोरदार टक्कर में कई यात्री घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए कांकेर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। घटना केशकाल थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। स्थानीय लोगों का कहना है कि बसों में टाइमिंग की होड़ हादसों की बड़ी वजह बन रही है। निर्धारित समय पर पहुंचने के दबाव में चालक तेज रफ्तार और ओवरटेकिंग करते हैं। केशकाल घाट जैसे संवेदनशील मार्ग पर यह जोखिम और बढ़ जाता है। यात्रियों ने बस संचालकों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। आरोप है कि क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाई जाती हैं। समय बचाने के नाम पर यात्रियों को जल्दबाजी में उतारा-चढ़ाया जाता है। लोगों ने यातायात नियमों के सख्त पालन की मांग की है। लगातार हादसे प्रशासन के लिए चेतावनी बन रहे हैं। अब जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है।
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