Parshuram Jayanti 2026: Dharm Desk. भगवान विष्णु के छठे अवतार को समर्पित एक महत्वपूर्ण पर्व है. वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन अक्षय तृतीया भी है. इसलिए इस दिन का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है. परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएगी, क्योंकि इस दिन तृतीया तिथि सुबह 10 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 28 मिनट तक रहेगी और पूरे दिन व्याप्त होने के कारण यही दिन पर्व के लिए मान्य होगा. इस दिन पूजा मुहूर्त सुबह 7 बजकर 29 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट रहेगा. वहीं शाम पूजा शुभ समय सुबह 6 बजकर 49 मिनट से सुबह 10 बजकर 57 मिनट रहेगा.
परशुराम जयंती का महत्व (Parshuram Jayanti 2026)
पौराणिक मान्य है कि भगवान परशुराम का जन्म धरती पर बढ़ते अधर्म और अन्याय को समाप्त करने के लिए हुआ था. वे ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे . इसलिए उन्हें जामदग्न्य भी कहा जाता है. ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाए. जिससे वे कर्म से क्षत्रिय भी माने जाते है . भगवान शिव के परम भक्त परशुराम ने कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें दिव्य अस्त्र ‘परशु’ प्रदान किया थ्रा . यही उनका प्रमुख प्रतीक बन गया.
भगवान परशुराम की पूजा विधि और व्रत नियम (Parshuram Jayanti 2026)
इस दिन प्रातःकाल स्नान करके व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है. घर के पूजा स्थल को साफ कर भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. इसके बाद कुमकुम, चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें. घी का दीपक और धूप जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करें. भगवान को खीर , फल और तुलसी दल का भोग लगाना शुभ माना जाता है . व्रत रखने वाले भक्त दिनभर फलाहार करते हैं. अंत में आरती कर प्रसाद का वितरण करें. अगले दिन प्रातः व्रत का पारण किया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और स्तोत्र पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.
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