चंडीगढ़। पंजाब में बेअदबी की घटनाओं पर नकेल कसने के लिए सरकार और पुलिस प्रशासन ने कमर कस ली है। हाल ही में राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया द्वारा जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026 पर हस्ताक्षर करने के बाद अब यह राज्य में कानून बन चुका है। इसके साथ ही, पंजाब पुलिस ने बेअदबी के मामलों की जांच के लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है।

नया कानून बेअदबी के मामलों को लेकर अत्यंत सख्त है। इसमें दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा और 20 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। यदि आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ पाया जाता है, तो उसके अभिभावक (गार्डियन) को कानून के दायरे में लाकर जवाबदेह ठहराया जाएगा। पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन द्वारा तैयार की गई इस नई SOP का उद्देश्य जांच में पारदर्शिता, गति और तकनीकी सटीकता लाना है। अब बेअदबी के मामलों में 60 से 90 दिनों के भीतर चालान पेश करना अनिवार्य होगा। घटना की सूचना मिलते ही SHO और जांच अधिकारी को तुरंत मौके पर पहुंचना होगा। साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए घटनास्थल पर आंतरिक और बाहरी घेरा बनाया जाएगा ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। इन मामलों की सीधी निगरानी संबंधित एसएसपी (SSP) या पुलिस कमिश्नर द्वारा की जाएगी।

डिजिटल और फॉरेंसिक जांच पर जोर

आज के डिजिटल युग को देखते हुए पुलिस ने जांच के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाया है। सोशल मीडिया पर फैलने वाली डीपफेक वीडियो, भ्रामक पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए एआई (AI) टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा। बेअदबी की घटनाओं के पीछे बिटकॉइन और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली अवैध फंडिंग की भी बारीकी से जांच की जाएगी। यदि आरोपी मानसिक रूप से स्थिर नहीं है, तो उसकी स्थिति की जांच के लिए फॉरेंसिक मनोवैज्ञानिकों के एक बोर्ड का गठन किया जाएगा।