आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) को कथित भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) ने गुरुवार को दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रोजेक्ट्स की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में उन्हें जमानत दे दी। यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के विभिन्न सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट्स की टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। जांच एजेंसियों की ओर से टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे, जिसके आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई गई।

टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप

जांच एजेंसी का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के STP प्रोजेक्ट्स से जुड़े टेंडर में नियमों का पालन नहीं किया गया और प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं बरती गईं। इसी मामले में सत्येंद्र जैन की भूमिका को लेकर जांच की जा रही थी। कोर्ट की ओर से जमानत दिए जाने के बाद सत्येंद्र जैन को इस मामले में राहत मिली है। हालांकि, जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

18 अगस्त को ACB ने किया था गिरफ्तार

राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग्विनय सिंह ने सत्येंद्र जैन की जमानत पर यह आदेश सुनाया। ACB ने 18 अगस्त को उन्हें दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रोजेक्ट्स की टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के मामले में गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (PC Act) और इंडियन पीनल कोड (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। गुरुवार को कोर्ट से जमानत मिलने के बाद सत्येंद्र जैन को इस मामले में तत्काल राहत मिल गई है। हालांकि, जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।

सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों की हुई थी गिरफ्तारी

इस मामले में ACB ने आप नेता सत्येंद्र कुमार जैन समेत कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय, बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव और तीन निजी व्यक्ति शामिल हैं। आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रोजेक्ट्स की टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं हुई थीं। इसी मामले में ACB ने कार्रवाई करते हुए इन लोगों को गिरफ्तार किया था।

टेंडर की शर्तों में हेरफेर का आरोप

ACB के अनुसार, STP प्रोजेक्ट्स के टेंडर तैयार करने की प्रक्रिया में ऐसी तकनीकी शर्तें शामिल की गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन शर्तों के चलते एक विशेष तकनीक उपलब्ध कराने वाली कंपनी या एजेंसी को फायदा पहुंचने की स्थिति बन गई। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस तकनीक को लेकर पायलट प्रोजेक्ट के तहत जरूरी स्टडी नहीं कराई गई थी। इसके बावजूद टेंडर में तकनीक और मीडिया से संबंधित ऐसी शर्तें शामिल की गईं, जिनसे टेंडर प्रक्रिया प्रभावित होने का आरोप है।

निजी कंपनियों और अधिकारियों के बीच गठजोड़ के आरोप

ACB के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच के दौरान निजी व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों के बीच बातचीत सामने आई है। एजेंसी का दावा है कि इन बातचीत में टेंडर की शर्तों और उससे जुड़े अन्य दस्तावेजों को लेकर चर्चा की गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ निजी व्यक्ति सरकारी अधिकारियों और कथित बिचौलियों के संपर्क में थे। आरोप है कि इनके बीच हुई बातचीत के आधार पर टेंडर की शर्तों को एक विशेष कंपनी के पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश की गई।

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