चंडीगढ़। मानसून की दस्तक से पहले ही पंजाब में बाढ़ की आशंका को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं। भाखड़ा जलाशय में लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने पंजाब, हरियाणा समेत सभी साझेदार राज्यों को सिंचाई के लिए अधिक से अधिक पानी उपयोग करने की सलाह दी है।
यह निर्णय चंडीगढ़ में आयोजित बीबीएमबी की तकनीकी समिति की बैठक के दौरान लिया गया। बैठक में अधिकारियों ने राज्यों से उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया, ताकि जलाशय में अतिरिक्त पानी के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया जा सके।
बीबीएमबी के अनुसार इस समय भाखड़ा जलाशय का जलस्तर सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है। साथ ही आने वाले दिनों में हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ पिघलने और मानसून के दौरान भारी वर्षा के कारण जलाशय में पानी की आवक और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में यदि समय रहते पानी का उपयोग नहीं किया गया तो अतिरिक्त जल दबाव भविष्य में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।
बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 9 जून को भाखड़ा जलाशय का जलस्तर 1,578.07 फीट दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी दिन यह 1,556.60 फीट था। यानी इस बार जलस्तर में 21.47 फीट की वृद्धि दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, यह स्तर इस अवधि के औसत 1,543.72 फीट से भी काफी ऊपर है।
सूत्रों के मुताबिक जलाशय अब अपने पूर्ण जलस्तर से केवल 102 फीट नीचे रह गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून के दौरान सतलुज बेसिन में अचानक जल प्रवाह बढ़ता है या भारी बारिश होती है तो जलाशय की अतिरिक्त भंडारण क्षमता सीमित होने के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

इसी संभावना को देखते हुए बीबीएमबी ने राज्यों को सिंचाई के लिए अधिक पानी लेने और जल प्रबंधन को प्रभावी बनाने की सलाह दी है, ताकि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
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