भोजपुर जिले के बिलौटी क्षेत्र में हुए इस एनकाउंटर प्रकरण में अब पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। भोजपुर एसपी राज ने एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। गिरफ्तार जवान एसटीएफ की एसओजी टीम में तैनात था। इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद उसकी सरकारी पिस्टल पहले ही जब्त की जा चुकी थी और विभागीय स्तर पर उसे निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के बाद से ही वह जांच से बचता फिर रहा था।
पीड़ित परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा था। मृतक भरत भूषण तिवारी के भाई चंदन तिवारी का स्पष्ट रूप से कहना था कि उन्होंने अपनी आंखों से अक्षय कुमार को पहली गोली चलाते हुए देखा था। परिवार की इसि जिद और संघर्ष के बीच हाल ही में स्वजनों ने पटना जाकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने परिवार को निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का पूरा भरोसा दिलाया था, जिसके बाद इस गिरफ्तारी को एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
मां के बयान पर दर्ज हुई थी गंभीर धाराओं में प्राथमिकी
इस हाई-प्रोफाइल मामले की शुरुआत 22 जून को हुई, जब मृतक की मां आशा देवी के बयान पर शाहपुर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। इस एफआईआर में तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत अन्य कई पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपित बनाया गया था। पुलिस ने इस मामले में हत्या, आर्म्स एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी।
आत्मसमर्पण के बाद गोली मारने का गंभीर आरोप
प्राथमिकी में मां आशा देवी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, 17 जून की सुबह कुछ पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंचे थे। वे उनके बेटे भरत भूषण तिवारी को यह कहकर अपने साथ ले गए थे कि उन्हें जवइनिया चलकर बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं बतानी हैं। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने सुनियोजित तरीके से आत्मसमर्पण के बाद उसे गोली का शिकार बनाया। अब एसटीएफ जवान की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच और तेज हो गई है और पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद बंधती नजर आ रही है।


