एसेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। LIC Housing Finance की शिकायत पर CBI ने सुभाष चंद्रा और एसेल ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ ₹1,322 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में FIR दर्ज की है। CBI की बैंकिंग एंड सिक्योरिटी फ्रॉड डिविजन ने 31 अगस्त को यह मामला दर्ज किया।
NCLT के फैसले के चार दिन बाद FIR
यह कार्रवाई 27 अगस्त के NCLT फैसले के चार दिन बाद हुई। LIC Housing Finance ने 31 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई और उसी दिन CBI ने FIR दर्ज कर ली। शिकायत में सुभाष चंद्रा के अलावा एसेल ग्रुप से जुड़ी कई कंपनियों, उनके निदेशकों और अज्ञात सरकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।
नेटवर्थ सर्टिफिकेट पर उठे गंभीर सवाल
LIC Housing Finance के मुताबिक, ₹500 करोड़ और ₹480 करोड़ के लोन के लिए सुभाष चंद्रा ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी। इसके लिए जमा किए गए दो नेटवर्थ सर्टिफिकेट में उनकी संपत्ति क्रमशः ₹59,113 करोड़ और ₹40,562 करोड़ बताई गई थी।
हालांकि, व्यक्तिगत दिवालिया कार्यवाही के दौरान चंद्रा ने इन आंकड़ों से इनकार करते हुए 2024 में अपनी नेटवर्थ केवल ₹31.79 करोड़ बताई। शिकायत में आरोप है कि गलत दस्तावेजों और बढ़ी हुई नेटवर्थ के आधार पर लोन मंजूर और वितरित कराया गया।
किन कंपनियों पर मामला दर्ज?
FIR में सुभाष चंद्रा के साथ वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड समेत संबंधित निदेशकों के नाम शामिल हैं।
₹22,006 करोड़ की देनदारी और ₹6.5 करोड़ का सेटलमेंट
यह मामला उस विवाद के बीच सामने आया है, जिसमें NCLT ने करीब ₹22,006 करोड़ की देनदारी के बदले ₹6.5 करोड़ में दिवालिया मामला निपटाने का फैसला दिया था। विवाद बढ़ने के बाद पांच सदस्यीय NCLT ने इस फैसले पर रोक लगा दी।
LIC Housing Finance ने शिकायत में चंद्रा के विदेश जाने की आशंका भी जताई है। अब CBI कथित लोन धोखाधड़ी में असल लाभार्थियों, दस्तावेजों और संभावित मिलीभगत की जांच कर सकती है।
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