रायपुर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से रोजगार की तलाश में तमिलनाडु गए 48 मजदूरों को बंधुआ मजदूरी के चंगुल से मुक्त कराया गया है। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। मामले में गौशाला संचालक और उसकी पत्नी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, इन श्रमिकों को तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के देवंदवकम गांव स्थित एक बड़ी गौशाला में कथित तौर पर बंधक बनाकर काम कराया जा रहा था। गौशाला में करीब दो हजार गायें रखी गई हैं और मजदूरों को उनकी देखभाल सहित अन्य कार्यों में लगाया गया था।
एक मजदूर के भाग निकलने से हुआ खुलासा
मामले का खुलासा तब हुआ जब वहां काम कर रहा एक मजदूर किसी तरह परिसर से बाहर निकलने में सफल हो गया। उसने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को पूरी जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर छापेमार कार्रवाई की और सभी 48 मजदूरों को मुक्त कराया।
14 घंटे से अधिक कराया जाता था काम
जांच के दौरान सामने आया कि श्रमिकों से प्रतिदिन 14 घंटे से अधिक काम लिया जा रहा था। इसके बावजूद उन्हें तय मजदूरी नहीं दी जा रही थी। इतना ही नहीं, मजदूरों को परिसर से बाहर जाने की अनुमति भी नहीं थी, जिससे वे पूरी तरह गौशाला परिसर तक सीमित हो गए थे।
अधिकारियों के अनुसार श्रमिकों को लगातार काम करने के लिए मजबूर किया जाता था और उनके साथ शोषणपूर्ण परिस्थितियों में काम कराया जा रहा था।
रोजगार का झांसा देकर ले जाया गया था तमिलनाडु

प्रशासनिक जांच में पता चला है कि मजदूरों को काम दिलाने की व्यवस्था अरविंद नामक एक श्रमिक ठेकेदार ने की थी। आरोप है कि गौशाला संचालक नटराजन और उनकी पत्नी ने रोजगार का लालच देकर मजदूरों को तमिलनाडु बुलाया था।
बताया गया कि प्रत्येक दंपति को 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने का वादा किया गया था। इसके अलावा परिवहन खर्च के लिए 75 हजार रुपये अग्रिम देने की बात भी कही गई थी।
जानकारी के मुताबिक मजदूरों का पहला दल 5 मई को तमिलनाडु पहुंचा था, जबकि कुछ दिन बाद दूसरा दल अपने बच्चों के साथ वहां पहुंचा। इसके बाद सभी को गौशाला के अलग-अलग कार्यों में लगा दिया गया।
25 दिनों तक नहीं मिली मजदूरी
राजस्व मंडल अधिकारी रविचंद्रन ने बताया कि श्रमिकों को 25 दिनों तक कोई मजदूरी नहीं दी गई। उनसे लगातार लंबे समय तक काम कराया जाता रहा और उनकी आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाया गया था।
उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौशाला मालिक और पत्नी पर केस दर्ज
पुलिस ने गौशाला संचालक नटराजन (60) और उनकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि जांच में श्रमिकों के साथ शारीरिक प्रताड़ना के प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन उन्हें अमानवीय और शोषणकारी परिस्थितियों में काम कराए जाने की पुष्टि हुई है।
प्रत्येक पीड़ित को मिलेगी 35 हजार रुपये की सहायता
प्रशासन ने सभी पीड़ित श्रमिकों के बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। केंद्र प्रायोजित योजना के तहत प्रत्येक पीड़ित को तत्काल राहत के रूप में 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा सभी श्रमिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित रूप से छत्तीसगढ़ वापस भेजने की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि पीड़ितों के पुनर्वास और सहायता के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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