केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) में वर्षों से चली आ रही कथित ‘दिल्ली क्लब’ संस्कृति को समाप्त करने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नई पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी लागू होने के बाद अब कोई भी अधिकारी या कर्मचारी 20-30 वर्षों तक एक ही स्थान पर पदस्थ नहीं रह सकेगा।

‘प्रभावशाली लोगों’ की सिफारिशें भी आईं

CPWD के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने बताया कि नई ट्रांसफर नीति लागू होने के बाद उनके पास कई प्रभावशाली लोगों के फोन और सिफारिशें आईं। उन्होंने कहा, “कुछ असरदार लोगों ने ट्रांसफर रद्द कराने का अनुरोध किया। मुझे बताया गया कि कई कर्मचारी ऐसे थे, जिनका दशकों तक ट्रांसफर ही नहीं हुआ। उन्हें कोई हटा नहीं पाता था।”

लुटियंस दिल्ली में बनी थी मजबूत पकड़

मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि लुटियंस दिल्ली में CPWD के कुछ अधिकारियों की मजबूत पकड़ का कारण यह था कि कई प्रभावशाली लोग अपनी सुविधाओं के लिए उन पर निर्भर हो गए थे। इससे एक ऐसा तंत्र विकसित हो गया था, जिसे तोड़ना आसान नहीं माना जाता था। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों को केवल अपने व्यक्तिगत हित नहीं, बल्कि पूरे विभाग और आम जनता के हित को प्राथमिकता देनी होगी।

हरियाणा मॉडल का दिया उदाहरण

मंत्री ने अपने हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2015 में शिक्षकों के लिए पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी लागू की गई थी। उस समय राजनीतिक दबाव और विरोध के बावजूद सरकार अपने फैसले पर कायम रही। बाद में हुए एक सर्वे में 93 प्रतिशत शिक्षकों ने नई व्यवस्था पर संतोष जताया।

‘सिफारिश नहीं, नीति से होगा ट्रांसफर’

खट्टर ने कहा कि उन्होंने वर्ष 1996-97 में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को ट्रांसफर के लिए तय नीति बनाने का सुझाव दिया था। उस समय आशंका जताई गई थी कि इससे नेताओं के पास सिफारिशें लेकर आने वाले लोग कम हो जाएंगे। हालांकि, नीति लागू होने के बाद लोगों का भरोसा बढ़ा क्योंकि उन्हें किसी की कृपा या सिफारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।

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