दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने एक कंडक्टर के 17 महीने के बकाया वेतन से जुड़े मामले में 32 साल तक मुकदमा चलाने पर दिल्ली परिवहन निगम (DTC) पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला कंडक्टर की बर्खास्तगी से जुड़ा है, जिस पर यात्रियों को टिकट जारी किए बिना उनसे 67 रुपये लेने का आरोप लगाया गया था। हाई कोर्ट ने मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया पर नाराजगी जताते हुए DTC पर यह जुर्माना लगाया। कंडक्टर ने बर्खास्तगी के बाद 17 महीने के बकाया वेतन का दावा किया था, जिसके खिलाफ डीटीसी की ओर से लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली।
32 साल तक मुकदमा चलाने पर DTC पर 1 लाख का जुर्माना
2 सितंबर को दिए गए फैसले में जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने कहा कि इतने लंबे समय तक विवाद चलने से कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग हुआ और सार्वजनिक धन का अनावश्यक खर्च हुआ। पीठ ने यह टिप्पणी डीटीसी की उस याचिका पर की, जिसमें उसने औद्योगिक न्यायाधिकरण के 2004 के फैसले को चुनौती दी थी। औद्योगिक न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में कंडक्टर के 17 महीने के बकाया वेतन के दावे को स्वीकार किया था। डीटीसी ने इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने डीटीसी की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि इतने सीमित दावे से जुड़े मामले को अत्यधिक लंबी अवधि तक जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
क्या है 1994 वाला ये मामला?
यह औद्योगिक विवाद वर्ष 1994 से चला आ रहा था और इसका संबंध डीटीसी के बस कंडक्टर राजेंद्र प्रसाद के खिलाफ की गई कार्रवाई से था। प्रसाद पर आरोप था कि उन्होंने यात्रियों को टिकट जारी किए बिना उनसे 67 रुपये लिए थे। इसके बाद डीटीसी ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की और 1996 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। बाद में प्रसाद ने डीटीसी के प्रबंध निदेशक के समक्ष अपील की। अपील पर उन्हें बिना बकाया वेतन के सेवा में बहाल कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने बकाया वेतन नहीं दिए जाने को लेकर औद्योगिक विवाद उठाया। औद्योगिक न्यायाधिकरण ने प्रसाद के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी बर्खास्तगी को अवैध और निराधार माना। ट्रिब्यूनल ने डीटीसी को 1996 से 1998 तक की अवधि का बकाया वेतन देने का निर्देश दिया।
2005 से हाई कोर्ट में लंबित था मामला
औद्योगिक न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती देते हुए डीटीसी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। वर्ष 2005 में हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले के संचालन पर रोक लगा दी थी। करीब 32 साल तक चले इस विवाद पर अब 2 सितंबर को हाई कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाया। अदालत ने औद्योगिक न्यायाधिकरण के फैसले को उचित और तर्कसंगत मानते हुए बरकरार रखा। साथ ही, इतने लंबे समय तक सीमित दावे से जुड़े मामले को जारी रखने पर DTC पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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