दिल्ली पुलिस के ADCP संदीप लांबा को उस वीडियो के सामने आने के बाद आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है जिसमें उन्हें एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए दिखाया गया है. संसद चलो मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई का यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंच गया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया.
एक पुलिस अधिकारी द्वारा महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने का एक वीडियो में दावा किया गया है. उसके बाद से ही दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं.
दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को संसद चलो मार्च के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सुनवाई हुई. वायरल वीडियो में दिल्ली पुलिस के ADCP संदीप लांबा एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं. सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.
दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि उनकी टीम ने घटना से जुड़े करीब 130 वीडियो की जांच की है. अदालत में अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने बताया कि बहुत से ऐसे भी पुलिस वाले देखे गए जो बिना पुलिस वर्दी और बिना पहचान बैज के प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग कर रहे थे.
उन्हीं वीडियो में से एक का हवाला देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस के उत्तर पूर्व जिले के ADCP संदीप लांबा एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं. जबकि वीडियो में साफ दिख रहा है कि वह कुछ नहीं कर रही थी.
वहीं, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने फिलहाल आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
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