गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे पर लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया है। एक्सप्रेसवे के प्रतिबंधित मेन कैरेजवे पर वाहन दौड़ाने वाले ड्राइवरों के खिलाफ अब केवल चालान नहीं, बल्कि सीधे कानूनी मुकदमा (FIR) दर्ज किया जाएगा।

गुरुग्राम। द्वारका एक्सप्रेसवे पर बेलगाम रफ्तार और नियमों की अनदेखी के चलते आए दिन दुखद हादसे हो रहे हैं। शुक्रवार दोपहर को सेक्टर 37 स्थित एवीएल सोसाइटी के नजदीक एक बड़ा हादसा सामने आया, जहां सरिया ले जा रहे एक कमर्शियल टेंपो से कार की भीषण भिड़ंत हो गई। इस दर्दनाक एक्सीडेंट में एक कैब ड्राइवर को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह घटना उस निरंतर लापरवाही का परिणाम है जो इस एक्सप्रेसवे पर प्रतिदिन देखने को मिल रही है।

प्रतिबंधित वाहनों की एंट्री

हाई-स्पीड सफर के लिए तैयार किए गए द्वारका एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है, मगर यहां नियमों को दरकिनार कर उन वाहनों को भी दौड़ाया जा रहा है जिनका प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। यातायात पुलिस द्वारा जारी आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि चालू वर्ष के शुरुआती छह महीनों के भीतर ही 63,400 वाहन चालकों ने नो-एंट्री के नियमों का उल्लंघन किया है। तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक, इस एक्सप्रेसवे के मुख्य मार्ग (मेन कैरेजवे) पर मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा और ऑटो जैसे तीन पहिया व दो पहिया वाहनों के चलने पर पूर्ण प्रतिबंध है, इसके बावजूद लोग बेखौफ होकर गाड़ियां चला रहे हैं।

जमीनी हकीकत यह है कि सुबह से लेकर रात तक यहां सवारियों से लदे ई-रिक्शा और ऑटो आसानी से देखे जा सकते हैं। दुपहिया वाहन चालक कम दूरी तय करने के चक्कर में तेज गति वाली लेन में चले जाते हैं। वहीं, सामान ढोने वाले ओवरलोड वाहन बिना किसी रिफ्लेक्टर के चलते हैं। ट्रैफिक विशेषज्ञों के मुताबिक, 100 की रफ्तार से आ रही गाड़ी के सामने जब अचानक बेहद धीमी गति का वाहन आता है, तो हादसे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

पुलिस दर्ज करेगी मुकदमा

यातायात पुलिस के अधिकारियों ने अब इस मनमानी से निपटने के लिए एक नई और सख्त योजना तैयार की है। एसीपी ट्रैफिक (हाईवे एवं मुख्यालय) सत्यपाल यादव ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं का मुख्य कारण चालकों द्वारा बरती जा रही घोर लापरवाही है। पुलिस बल कैमरों और नाकाबंदी के माध्यम से हर दिन सैकड़ों चालान काट रहा है, फिर भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।

अधिकारी ने साफ किया कि अब रणनीति में बदलाव किया जा रहा है। हाईवे पर दूसरों की जान जोखिम में डालने वाले चालकों को चिन्हित कर उनके खिलाफ केवल आर्थिक जुर्माना (चालान) नहीं किया जाएगा, बल्कि सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी ताकि सख्त संदेश जा सके।

सुरक्षा इंतजामों पर सवाल

छह माह के भीतर केवल कैमरों की मदद से 63 हजार से ज्यादा चालान होना यह दर्शाता है कि हर दिन औसतन 350 से अधिक लोग यहां कानून तोड़ रहे हैं। इसके अलावा जमीनी स्तर पर भी पुलिस कर्मियों द्वारा बड़ी संख्या में चालान किए गए हैं। जानकारों का मानना है कि इस गंभीर समस्या का हल केवल चालान काटने से नहीं निकलने वाला है। एक्सप्रेसवे के प्रवेश द्वारों पर मजबूत बैरियर लगाने, पुलिस बल की नियमित तैनाती बढ़ाने और चालकों को जागरूक करने की बेहद जरूरत है, ताकि इन हादसों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।