ज्ञान भारद्वाज, गाजियाबाद। जनपद आज जिस स्वरूप में दिखाई देता है, वह केवल भौगोलिक विकास या शहरी विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और पुलिस व्यवस्था के निरंतर प्रयासों की भी कहानी है। दिल्ली से सटा होने के कारण गाज़ियाबाद हमेशा से सामरिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण जनपद माना जाता रहा है। एक समय ऐसा भी था जब गाज़ियाबाद का नाम सुनते ही लोगों के मन में अपराध, गैंगवार, अवैध कब्जों, दबंगई और संगठित अपराध की छवि उभर आती थी। यहां तक कि लोकप्रिय फिल्मों और जनचर्चाओं में भी गाज़ियाबाद को अपराध प्रभावित क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा।
गाजियाबाद को नई दिशा देने का प्रयास किया
जैसे – जिला गाज़ियाबाद कई बार यह आशंका व्यक्त की जाती थी कि अपराधियों का मनोबल बढ़ाने वाली सामाजिक मानसिकताएँ और अपराध के महिमामंडन की प्रवृत्ति समाज को गलत दिशा में ले जा सकती हैं।किन्तु समय के साथ परिस्थितियाँ बदलीं। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की नीति, पुलिस आधुनिकीकरण, कमिश्नरेट व्यवस्था की स्थापना और प्रशासनिक जवाबदेही ने गाज़ियाबाद को नई दिशा देने का प्रयास किया।
पुलिस की व्यवस्था उल्लेखनीय
आज गाज़ियाबाद पुलिस कमिश्नरेट को राज्य के सक्रिय और संवेदनशील पुलिस तंत्रों में गिना जाता है। इसका श्रेय केवल किसी एक अधिकारी या किसी एक सरकार को नहीं, बल्कि उन हजारों पुलिसकर्मियों, अधिकारियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को भी जाता है जो दिन-रात जनता की सुरक्षा में लगे रहते हैं। इसी व्यवस्था के भीतर उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा (PPS) की अधिकारी एसीपी उपासना पांडेय जैसी महिला अधिकारियों का योगदान भी विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है।
गोंडा जनपद की रहने वाली और PPS-2016 बैच की अधिकारी उपासना पांडेय का पुलिस सेवा तक पहुंचना स्वयं में संघर्ष, समर्पण और निरंतर प्रयास की कहानी को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश के एक सामान्य जनपद से निकलकर पुलिस सेवा के महत्वपूर्ण पद तक पहुंचना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा का विषय है जो प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में अपना भविष्य देखती हैं।
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वह मानती है कि पुलिस सेवा का जीवन सामान्य सरकारी नौकरी की तरह नहीं होता। इसमें चौबीसों घंटे जिम्मेदारी, संवेदनशील परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता, सामाजिक तनावों से निपटने का धैर्य और कानून के प्रति पूर्ण निष्ठा की अपेक्षा की जाती है। विशेष रूप से महिला अधिकारियों के लिए यह दायित्व और भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है क्योंकि उन्हें सामाजिक पूर्वाग्रहों, पारिवारिक अपेक्षाओं और सेवा संबंधी कठिन परिस्थितियों के बीच संतुलन स्थापित करना पड़ता है।
गाज़ियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में तैनाती के दौरान एसीपी उपासना पांडेय ने महिला पुलिस टीमों के साथ कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया। अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई, हिस्ट्रीशीटरों की गिरफ्तारी, ई-रिक्शा चोरी जैसे संगठित अपराधों के विरुद्ध अभियान तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनकी सक्रिय भूमिका चर्चा का विषय रही। विशेष रूप से महिला पुलिस टीम द्वारा संचालित अभियानों ने यह संदेश दिया कि आधुनिक पुलिसिंग में महिलाएं केवल भागीदारी नहीं निभा रहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका भी निभा रही हैं गाज़ियाबाद की पहली पूर्ण महिला पुलिस टीम द्वारा एक वांछित अपराधी के विरुद्ध की गई कार्रवाई भी व्यापक रूप से चर्चा में रही।
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इस प्रकार की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि पुलिस व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका निरंतर सशक्त हो रही है और वे चुनौतीपूर्ण अभियानों का सफल नेतृत्व करने में सक्षम हैं।आज का अपराध केवल पारंपरिक अपराध तक सीमित नहीं है। साइबर अपराध, डिजिटल धोखाधड़ी, संगठित गिरोह, नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार, फर्जी पहचान पत्रों का उपयोग और अंतरराज्यीय नेटवर्क पुलिस के सामने नई चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए गाज़ियाबाद में क्राइम ब्रांच, सर्विलांस टीम, साइबर क्राइम यूनिट, स्थानीय खुफिया तंत्र तथा विभिन्न जांच एजेंसियाँ समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी और सूचनाओं के त्वरित विश्लेषण ने पुलिसिंग की कार्यशैली को नई दिशा दी है। नशे के विरुद्ध चलाए गए अभियान भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे हैं। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए समय-समय पर विशेष अभियान संचालित किए गए। समाज में बढ़ते नशे के खतरे को देखते हुए यह प्रयास केवल कानूनी कार्रवाई नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा का भी विषय माना जाता है।
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कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस को त्वरित निर्णय लेने और प्रभावी कार्रवाई करने की अधिक प्रशासनिक क्षमता प्राप्त हुई। इसका प्रभाव विभिन्न थाना क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण, हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी, गैंगस्टर कार्रवाई, अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण और जनसुरक्षा के उपायों में दिखाई देता है। कई अवसरों पर अपराधियों को सार्वजनिक रूप से यह संदेश देते हुए भी देखा गया कि वे भविष्य में अपराध से दूर रहेंगे। ऐसी घटनाएँ कानून के प्रति बढ़ती जवाबदेही और पुलिस की सक्रिय उपस्थिति को दर्शाती हैं।गाज़ियाबाद, साहिबाबाद, ट्रांस हिंडन, कौशाम्बी, मसूरी, डासना , जिसमें हापुड़ धौलाना और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समय-समय पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी भी की जाती रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस और अन्य एजेंसियों की सतर्कता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
ओवर ग्राउंड वर्कर स्लीपर सेल का आई एस आई का सहयोग करने वाले व्यक्तियो के खिलाफ किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जांच, सूचना संग्रह और आवश्यक कार्रवाई कानून के दायरे में की जाती है, जिससे जनसुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।खोड़ा कॉलोनी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमेशा चुनौतीपूर्ण कार्य माना गया है। हाल के वर्षों में कई संवेदनशील घटनाओं के दौरान प्रशासन और पुलिस को अत्यंत सावधानी के साथ कार्य करना पड़ा। सूर्या चौहान हत्याकांड जैसी घटनाओं के बाद उत्पन्न तनावपूर्ण परिस्थितियों में जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने क्षेत्र का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की तथा शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
ऐसी परिस्थितियों में पुलिस की भूमिका केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज में विश्वास बहाल करना, अफवाहों को रोकना और विभिन्न समुदायों के बीच संवाद स्थापित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस का दायित्व अत्यंत जटिल होता है। पुलिस को कानून का पालन भी कराना होता है और नागरिक अधिकारों की रक्षा भी करनी होती है। कई बार पुलिस को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, सामाजिक दबावों और जनभावनाओं के बीच संतुलन बनाकर कार्य करना पड़ता है। इसके बावजूद अधिकांश पुलिसकर्मी और अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास करते हैं।
गाज़ियाबाद जैसे महत्वपूर्ण जनपद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्था भी अत्यंत संवेदनशील विषय होती है। ऐसे अवसरों पर सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के बीच व्यापक समन्वय स्थापित किया जाता है। किसी भी वीआईपी कार्यक्रम का शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न होना पुलिस की योजना, अनुशासन और दक्षता का परिचायक माना जाता है।
पूर्व में एसीपी प्रिया पाल सहित अनेक अधिकारियों ने भी क्षेत्रीय कानून-व्यवस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विभिन्न संवेदनशील अवसरों पर अधिकारियों का स्वयं मैदान में उतरकर स्थिति की निगरानी करना पुलिस नेतृत्व की सक्रियता को दर्शाता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कानून-व्यवस्था केवल कार्यालयों में बैठकर नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर निरंतर उपस्थिति और संवाद के माध्यम से संचालित होती है।
आज गाज़ियाबाद पुलिस कमिश्नरेट केवल अपराध नियंत्रण की संस्था नहीं रह गई है, बल्कि तकनीकी पुलिसिंग, साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा, सामुदायिक पुलिसिंग, जनसहभागिता और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के माध्यम से आधुनिक पुलिस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनने का प्रयास कर रही है। इस पूरी व्यवस्था में कार्यरत महिला और पुरुष अधिकारी समान रूप से योगदान दे रहे हैं।
एसीपी उपासना पांडेय जैसी अधिकारी इस परिवर्तनशील पुलिस व्यवस्था का प्रतीक हैं, जहाँ संघर्ष, सेवा, अनुशासन, नेतृत्व और जनसुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है। गोंडा की धरती से निकलकर गाज़ियाबाद जैसे चुनौतीपूर्ण जनपद में जिम्मेदारी निभाना केवल एक प्रशासनिक पद की कहानी नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी भी है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन, सामाजिक शांति और नागरिक सुरक्षा सर्वोपरि है। यही वह आधार है जिस पर आधुनिक उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था व्यवस्था अपने भविष्य का निर्माण कर रही है।

