जींद। मां ने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए 15 लाख रुपये का कर्ज उठाया, रिश्तेदारों से मदद ली और उसे मॉल्डोवा भेज दिया। महज नौ महीने बाद वही बेटा सफलता की खबर देने के बजाय ताबूत में गांव लौटा। जींद के चांदपुर गांव के 22 वर्षीय निहाल सिंह की मॉल्डोवा में नदी में डूबने से मौत हो गई। रविवार को 17 दिन के इंतजार के बाद उसका शव गांव पहुंचा तो परिवार की सारी उम्मीदें मातम में बदल गईं। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी बहन ने अपने इकलौते भाई को मुखाग्नि दी।
होटल मैनेजमेंट पढ़ने गया था निहाल
परिजनों के मुताबिक निहाल करीब नौ महीने पहले स्टडी वीजा पर मॉल्डोवा गया था। वह होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा था। पढ़ाई के खर्च और परिवार पर पड़े आर्थिक बोझ को कम करने के लिए उसने चिशिनाउ सिटी के एक होटल में पार्ट टाइम डिलीवरी बॉय का काम भी शुरू कर दिया था।
परिवार से उसकी नियमित बातचीत होती थी। विदेश जाने के बाद घरवालों को भरोसा था कि पढ़ाई पूरी करने के बाद निहाल नौकरी हासिल करेगा और जिस कर्ज के सहारे वह विदेश पहुंचा है, उसे धीरे-धीरे चुका देगा।
दोस्तों के साथ घूमने निकला, नदी में डूब गया
बताया गया है कि 31 जुलाई को निहाल अपने दोस्तों के साथ घूमने गया था। इसी दौरान निस्दू रिवर में वह पानी में डूब गया। हादसे की सूचना मिलने के बाद परिवार के लिए इंतजार का ऐसा दौर शुरू हुआ, जिसका अंत बेहद दर्दनाक रहा।
कई दिनों की प्रक्रिया के बाद उसका शव भारत लाया जा सका। परिजनों के अनुसार शव को गांव तक लाने में ही करीब 10 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च हो गया। पहले बेटे को विदेश भेजने के लिए 15 लाख रुपये का इंतजाम करना और फिर शव वापस लाने के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना परिवार के लिए बेहद मुश्किल रहा। रिश्तेदारों और परिचितों के साथ अन्य लोगों ने भी परिवार की आर्थिक मदद की।
सात साल पहले पिता की मौत ने छोड़ा था मां पर पूरा बोझ
निहाल के पिता कृष्ण कुमार की करीब सात वर्ष पहले हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। इसके बाद मां सुनीता देवी ने अकेले ही दोनों बच्चों की परवरिश की। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्होंने घर के पास करियाना की दुकान चलाकर बच्चों को संभाला।
निहाल परिवार का इकलौता बेटा था। मां की उम्मीदें उससे जुड़ी थीं कि वह पढ़ाई करके अपने पैरों पर खड़ा होगा और आगे चलकर परिवार का सहारा बनेगा। इसी उम्मीद में आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने उसे विदेश भेजने का जोखिम उठाया था।
मां की आंखों के सामने बेटे की अर्थी उठी
रविवार को जब निहाल का शव चांदपुर पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। जवान बेटे का शव देखकर मां सुनीता देवी बेसुध हो गईं। जिस बेटे को कुछ महीने पहले बेहतर जिंदगी की तलाश में विदेश भेजा था, उसकी वापसी ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
दोपहर करीब दो बजे निहाल की बड़ी बहन ने अपने इकलौते भाई को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार का यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। परिवार ने जिस कर्ज के सहारे निहाल के भविष्य की नींव रखने की कोशिश की थी, उसी भविष्य का सपना उसकी असमय मौत के साथ खत्म हो गया।
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